अमेरिका ने घोषित किया येरुशलम को इजरायल की नई राजधानी, विरोध में उतरी आधी दुनिया

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वाशिंगटन-
अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के विरोधों को नजरंदाज करते हुए येरुशलम को इजरायल की नई राजधानी के तौर पर मान्यता दे दी है | साथ ही ट्रंप ने इस बात का भी एलान कर दिया है कि अमेरिका जल्द ही अपनी एम्बेसी को तेल अवीव से येरुशलम शिफ्ट करेगा | एक प्रेस वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका हमेशा से ही शांति का समर्थक रहा है और आगे भी रहेगा | उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीमा विवाद में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं होगी |

गौरतलब है कि इजरायल येरुशलम को सर्वाधिक पवित्र स्थान मानता है | इस इलाके को जिसे येरुशलम कहा जाता है इजरायल ने वर्ष 1967 में अपने कब्जे में ले लिया था, यहाँ यहूदी, मुस्लिम , ईशाई सभी धर्मों के बेहद पवित्र स्थल है | यहां स्थित टेंपल माउंट जहां यहूदियों का सबसे पवित्र स्थल है, वहीं अल-अक्सा मस्जिद को मुसलमान पाक मानते हैं | इजरायल पूरे येरुशलम को अपनी राजधानी बताता है जबकि फिलिस्तीनी पूर्वी येरूशलम को अपनी राजधानी बताते हैं |

ट्रम्प के फैसले का विरोध-
ट्रम्प के इस फैसले से पहले ही अरब देशों में इसके विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए | तुर्की, सीरिया, मिस्र, सऊदी अरब, जाॅर्डन, ईरान समेत 10 गल्फ देशों ने इस पर अमेरिका को वॉर्निंग दी है | चीन, रूस, जर्मनी आदि देशों ने कहा कि इससे तनाव बढ़ेगा | इस बीच अमेरिका ने अपने सिटिजंस को इजरायल की जाने से बचने की सलाह दी है |

येरुशलम में नहीं है किसी भी देश की एम्बेसी-
यूएन और दुनिया के ज्यादातर देश पूरे येरुशलम को इजरायल का है इसकी मान्यता नहीं देते है | 1948 में इजरायल ने अपनी आज़ादी की घोषणा की थी उसके बाद सबसे पहले अमेरिका ने ही इजरायल को एक राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी थी | फिलहाल आपको बता दें कि येरुशलम में किसी भी देश की एम्बेसी नहीं है | दुनिया के 86 देशों की एम्बेसी इजरायल में है जो कि तेल अवीव में है |

सऊदी के सुल्तान और मिस्र के राष्ट्रपति ने दी चेतावनी-
सऊदी अरब के सुल्तान सलमान ने कहा है कि अमेरिका के इस कदम से दुनियाभर के मुसलमान भड़क सकते हैं | वहीं, अमेरिका के करीबी दोस्त मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने इसे खतरनाक कदम बताया। फ्रांस, यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने भी ट्रम्प के इस कदम पर चिंता जताई है |

ज्यादातर देश अमेरिका के विरुद्ध –

ट्रम्प के इस फैसले का अरब लीग में शामिल 57 देशों ने विरोध किया है | यह सभी देश आगामी 12 दिसंबर को एक मीटिंग करके आगे की रणनीति पर विचार विमर्श करेंगे | तुर्की, सीरिया, मिस्र, सऊदी अरब, जाॅर्डन, ईरान समेत 10 से अधिक गल्फ देशों ने अमेरिका को वॉर्निंग दी है | फिलिस्तीन ने दुनिया के देशों से मदद की अपील की है |

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