उत्तराखंड बेहाल, राहत अधिकारी मालामाल…..

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उत्तराखंड में 2 साल पहले आई महाप्रलय में जहां एक तरफ लोग भूखे – प्यासे बदहाल हालत में पहाड़ों के बीच फसें थे वही दूसरी तरफ मानवता को शर्मसार कर बचाव कार्य के लिए आये अधिकारी और कर्मचारी पैसे बना रहा थे एक आर टी आई एक्टिविस्ट की कोशिशो के बाद प्राप्त, बचाव कार्य में हुए खर्च बिल चौकाने वाले हैं, इन बिलों के अनुसार बचाव कार्य में आये प्रति व्यक्ति पर प्रतिदिन 7000/- रूपये का खर्च दिखाया है, जिन गाड़ियों के नाम पर हज़ारों रूपये रोज़ का डीजल बिल दिखाया गया बाद में पता करने पर वे नंबर स्कूटर और मोटर साइकिल के निकले जो की पेट्रोल से चलते हैं।
एक प्राइवेट कंपनी के हेलीकाप्टर के डीजल के लिए 4 दिनों का 96 लाख रूपये भुगतान दिखाया गया है। फ़िलहाल एक्टिविस्ट की याचिका पर मुख्यमंत्री ने जाँच के आदेश दिए हैं।

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पर क्या हमारी संवेदनाएं इतनी कमजोर हो गयी हैं कि इस भीषण आपदा के समय में भी हम अपने फायदे अलावा कुछ और नही सोच पाते, क्या हमारा तंत्र इतना जर्जर हो चुका है कि इस तरह के असंवेदनशील वयवहार को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

हम अनुरोध करते हैं की कम से कम ऐसे मौको पर तो खुद से ऊपर उठ कर सोचें।

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