उ.प्र.- विधायकी गयी तो बेचने लगे एलआईसी की पालसियां

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भदोही (ब्यूरो)- राजनीति का अब नजरिया बदल गया है। पांच साल सत्ता में रहने वाले लोग फर्श से अर्श पर चले जाते हैं। सरकार जाने के बाद भी उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता हैं, क्योंकि इस दौरान करोड़ों की दौलत बना ली जाती है। लेकिन आज के युग में आपके सामने एक विधायक उदाहरण हो सकते हैं। यह माननीय उत्तर प्रदेश की भदोही विधानसभा के पूर्व एसपी विधायक हैं।

यह भारतीय जीवन वीमा निगम के अभिकर्ता हैं। एसपी सरकार में भदोही विधानसभा से विधायक थे। सरकार जाने के बाद वह फिर अपने काम पर लौट आएं हैं और एलआईसी की पालसियां बेंच रहे हैं। विधायक बनने के पहले भी वह निगम से जुड़े थे। आम तौर पर लोगों के मन होता है कि विधायकी जाने के बाद जनप्रतिनिधि क्या करते हैं। अधिकांश लोग सरकार में ठेका टेंडर का भरी भरकम जाल फैला कर मोटी कमायी संग्रहित कर लेते हैं। लेकिन भदोही के पूर्व एसपी विधायक जाहिद जमाल बेग इससे अलग हट कर हैं। विधायक बनने के पहले वह भारतीय जीवन बीमा निगम में अभिकर्ता के रुप में जुड़े थे। आज भी भदोही के स्टेशन रोड स्थित एलआईसी के कार्यालय में काम कतरे दिखे जा सकते हैं। जहिद बेग पूर्व की एसपी सरकार में पहली बार विधायक बने थे।

कभी उनके पिता सांसद हुआ करते थे। लेकिन उनकी सादगी लोगों के दिल को छू जाती है। सपा सरकार में जब विधायक रहे तो जिम्मेदारियों का अधिक दबाब था। उस स्थिति में एलआईसी के काम से बहुत कम भदोही ब्रांच में आते थे। लेकिन जब सरकार चली गयी और वह भाजपा विधायक रविंद्रनाथ त्रिपाठी से चुनाव हार गए। इसके बाद उन्होंने अपना पुराना काम संभाल लिया है। वह स्टेशन रोड स्थित भारतीय जीवन वीमा निगम की साखा में आए दिन आप को मिल जाएंगें। वह बेहद शालीन व्यक्तित्व के इंसान हैं। सत्ता और पावर में रहते हुए भी उन पर गरुर नहीं दिखा। आज जब सरकार चली गयी तो वह फिर से वीमा पालसी बेंचने का काम कर रह रहे हैं।

भदोही की साखा में वे अच्छे अभिकर्ता के रुप में सम्मानित हैं। एलाआईसी के कार्यालय में आते हैं और लोगों के बढ़ बढ़ कर हाथ मिलाते हैं और हमेंशा मुस्कराते रहते हैं। उन्हें अखिलेश सरकार में ईमानदार विधायक का खिताब भी मिला था। लोगों से आज भी वह मुस्करा कर मिलते हैं और लोगों को एलाआईसी की बीमा पालसियां लेने का आग्रह कतरे हैं। भारतीय जीवन वीमा निगम मे ंउनकी साख एक अच्छे अभिकर्ता के रुप में हैं। वीमा कार्यालय पहुंचते हैं लोगों में हाथ मिलाने की होड़ सी दिखती हैं और वे सादगी से लोगों का अभिवादन करते हैं और हाथ आगे बढ़ाते हैं।

रिपोर्ट- राजमणि पाण्डेय
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