विकास के जनक स्व० कल्पनाथ राय- दिव्येन्दु राय

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देश के गौरव पुर्वान्चल की पहचान स्व० कल्पनाथ राय जी जिन्होने इस देश की संसद मे घोषी की अलख जगाने का कार्य     किया। विकास पुरूष की आज 6 अगस्त को 17वीँ पुण्यतिथि है। विकास पुरूष स्व० कल्पनाथ राय जी ने 04 जनवरी           1941 को तत्कालीन आजमगढ जनपद वर्तमान समय मे मऊ जनपद के घोसी विकासखण्ड के अन्तर्गत सेमरीजमालपुर     ग्रामसभा मे एक किसान परिवार मे जन्म लिया एवं 6 अगस्त 1999 को 58 वर्ष की ही उम्र मे अपने शरीर का त्याग कर        दिया।
गोरखपुर विश्वविद्यालय से अंग्रेजी, मनोविज्ञान मे एमए एवं एलएलबी किया। 1974 से 3 बार 1992 तक राज्यसभा सांसद,1982-84 तक इन्दिरा गाँधी के कार्यकाल के दौरान केन्द्रीय मंत्री रहे। जून 1988 से दिसम्बर 1989 तक केन्द्रीय उर्जा राज्यमंत्री रहे। 10वीं लोकसभा मे चुने जाने के बाद पुन: ऊर्जा राज्यमंत्री स्वंतत्र प्रभार से बने। 1993-94 में फल उद्यान केन्द्रीय राज्य मंत्री बने।

राजीव गाँधी एवं नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान केन्द्र मे मंत्री रहे। स्व० कल्पनाथ राय जी के प्रयासों के फलस्वरूप 19 नवम्बर 1989 को मऊ एक अलग जनपद बना।

‘कल्पनाथ नाम प्यारा है दोस्तो,
पुर्वान्चल का विकास प्यारा है दोस्तो’

स्व० कल्पनाथ राय जी ने विकास की जो लकीर खींच दी है उस लकीर को कोई पार नही कर पाया। कल्पनाथ राय जी ने विकास करके एक नजीर पेश की थी अगर उनके मार्गदर्शन पर विकास हुआ होता तो आज पुर्वान्चल की यह दुर्दशा नही होती।

स्व० राय का सपना मऊ का सिंगापुर बनाने का था और उन्होने इस दिशा मे बहुत कुछ किया भी था लेकिन भगवान् को कुछ और मंजूर था और वह हमारे बीच नहीरहे……… विकासपुरूष की याद मे पुरा देश विशेषकर पुर्वान्चल रोता रह गया। विकास पुरूष स्व० कल्पनाथ राय जी बारे मे लिखने के लिये शब्दों का अकाल सा पङ जाता है। स्व० कल्पनाथ राय जी की पुण्यतिथि पर सत् सत् नमन।

दिव्येन्दु राय
कल्पनाथ वादी

 

Photo Credit  ( bhumiharbrahmin.blogspot.com )

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