वोट वही पायेगा जो क्षेत्र में रेल लाएगा

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जालौन। विधानसभा चुनाव में उसी प्रत्याशी को वोट दिया जाएगा जो नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने का आश्वासन देगा। पिछले वर्ष नगर में चले ऐतिहासिक रेल आंदोलन में लगभग सभी दलों ने रेल आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। इसके बावजूद चुनावों में किसी भी राजनैतिक दल ने जालौन को रेलवे लाइन से जोड़े जाने के लिए न तो कोई प्रयास किया और न ही ऐसा कोई आश्वासन ही दिया। नगर का क्षेत्र की जनता इस बात के लिए लामबंद हो रही है कि इस बार चुनाव में ऐसे प्रत्याशी को वोट दिया जाए जो नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने के लिए अपने स्तर से प्रयास कर आश्वासन देगा।

जालौन नगर को रेलवे मानचित्र पर लाए जाने की पहल काफी समय से हो रही है। इसके लिए पूर्व रेलमंत्री ममता बनर्जी के समय कोंच से जालौन होते हुए फफूंद तक रेलवे लाइन का सर्वेक्षण कार्य भी किया गया था। इसके बाद केंद्र में भाजपा सरकार आ गई। लोगों को उम्मीद थी कि सर्वेक्षण कार्य पूरा होने के बाद रेलवे लाइन के निर्माण के लिए बजट की आवश्यकता था। पिछले वर्ष के रेल बजट में जब रेल लाइन के निर्माण के लिए बजट जारी नहीं किया गया तो नगर व क्षेत्र की जनता में आक्रोश व्याप्त हो गया। जिसके बाद रेल लाओ स्वाभिमान बचाओ संघर्ष समिति के तत्वावधान में नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने के लिए आंदोलन की शुरूआत की गई। जिसके प्रथम चरण में 4 मार्च 2016 को ऐतिहासिक बाजार बंदी तथा मशााल जुलूस निकाला गया। इससे भी जब बात नहीं बनी तो नगर में लगातार 53 दिनों तक क्रमिश अनशन चला इसके बावजूद कोई सुनवाई न होने पर आंदोलनकारियों द्वारा आमरण अनशन की घोषणा की गई। आमरण अनशन की शुरूआत 30 अप्रैल 2016 से की गई जिसके बाद 3 मई को जिलाधिकारी संदीप कौर, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बब्लू कुमार के साथ रेलवे के डीआरएम प्रतिनिधि के तौर पर आए रेलवे के मंडल अधीक्षण अभियंता मनोज कुमार मिश्रा अनशन स्थल पर आए और उन्होंने आंदोलनकारियों के साथ बात कर नगर को अपने स्तर से प्रयास कर रेलवे लाइन से जोड़े जाने का आश्वसन दिया इतना ही नहीं डीआरएम प्रतिनिधि ने आंदोलनकारियों की मांग को तत्कालीन रेल मंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन भी दिया। इस आश्वासन के बाद अनशन समाप्त किया गया। यहां बताते चले कि उक्त आंदोलन को तब लगभग सभी राजनैतिक दलों से जुड़े एमएलसी प्रतिनिधि आरपी निरंजन, पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी, सदर विधायक दयाशंकर वर्मा, पूर्व मंत्री अकबर अली, वर्तमान बसपा प्रत्याशी विजय चैधारी, पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी, सुरेंद्र सरसेला, पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर पूर्व मंत्री ब्रजेंद्र सिंह, पूर्व राज्यसभा सांसद श्रीरामपाल, कामरेड रामसिंह चैधरी आदि सहित जिले भर के तमाम राजनैतिक दलों, सामाजिक संगठनों, विभिन्न संघों ने अपना समर्थन दिया था। इतना ही नहीं क्षेत्रीय सांसद भानु प्रताप वर्मा ने आंदोलन के संबंध में लोकसभा में भी बात उठाई थी। लेकिन अनशन के समापन के साथ ही बात ठंडे बस्ते में चली गई। उक्त आंदोलन के बाद किसी भी जनप्रतिनिधि ने जालौन नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने की बात नहीं की।

अब नगर की जनता इस बात के लिए लामबंद हो रही है कि राजनेता वादे तो तमाम कर जाते हैं लेकिन उनके आश्वासन सिर्फ आश्वासन तक ही सीमित होते हैं ऐसे में जो प्रत्याशी नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन देगा उसकी के पक्ष में वोट किया जाए।

व्यापारी सीतराम याज्ञिक कहते हैं कि नगर जालौन आजादी के बाद से जिला होने के बावजूद भी विकास से कोसों दूर है। रेल लाइन से नगर व क्षेत्रवासियों को विकास की एक उम्मीद जगी थी। परंतु क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते उक्त योजना परवान नहीं चढ़ सकी। अब ऐसे ही प्रत्याशी को वोट दिया जाएगा जो रेलवे लाइन से महरूम नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने का नगर की जनता के बीच आश्वासन देगा।

नगर के युवा मनीष वर्मा कहते हैं कि रेलवे लाइन होने से छात्रों को काफी सहूलियत होती। परंतु किन्ही कारणों के चलते नगर को रेलवे लाइन से नहीं जोड़ा गया जो कि नगर व क्षेत्रवासियों के लिए काफी दुखद है। इसलिए अब युवा ऐसे ही प्रत्याशी को वोट करेंगे जो नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने के लिए प्रयास करेगा।

किसान सलिल शुक्ला कहते हैं यदि रेलवे लाइन बन जाती तो किसानों को काफी सहूलियत होती। किसान अपना माल बड़ी मंडियों में बेच सकता था। लेकिन राजनेताओं की उपेक्षा के कारण उक्त लाइन का निर्माण नहीं हो सका। इसलिए अब वोट उसकी को होगी जो रेल लाइन देने का वादा करेगा।

रिपोर्ट – अनुराग श्रीवास्तव

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