यात्रियों के प्रतीक्षालयों में लग रहे कूड़े के ढेर

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बीघापुर-उन्नाव : उन्नाव-लालगंज राजमार्ग के किनारे कभी यात्रियों की सुविधा के लिए अलग-अलग सरकारों के समय अलग-अलग निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा यात्री प्रतीक्षालयों का निर्माण कराया गया था, किन्तु समय गुजरने के साथ ही जनप्रतिनिधयों का कार्यकाल समाप्त हुआ, सरकारें भी बदल गईं। अब उन यात्रियों के प्रतीक्षालय अपनी दुर्दषा को प्राप्त हो गए। सिर्फ रखरखाव के अभाव में। वहीं कुछ प्रतीक्षालयों में क्षेत्रीय नागरिकों व सरकारी महकमें ने भी कब्जा कर लिया है,वह भी बाकायदा बोर्ड लगा कर। जैसे अपने नाम रजिस्ट्री कराई हो। अब सवाल यह उठता है कि क्या इन प्रतीक्षालयों कोई भी महकमा या व्यक्ति स्थाई कब्जा कर सकता है? वहीं इस प्रतीक्षालयों में कहीं कहीं तो अराजक तत्वों ने अड्डा बना लिया तो कहीं ग्रामीणों ने कूड़े के ढेर लगा दिए।

अब सवाल यह भी उठता है कि क्या सरकारों व उस सरकार के जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद नई सरकार की जिम्मेदारी यह नहीं बनती कि विकास निधि से बने ये प्रतीक्षालय जनता के टैक्स के पैसे से बनाए गए हैं। तो सत्तासीन सरकारों ने इनके रखरखाव के लिए कोई योजना क्यों नहीं बनाई।इन प्रतीक्षालयों में कहीं सरकारी महकमें ने कब्जा जमा लिया है तो कहीं दबंगों ने।आखिर लोक निर्माण विभाग की भूमि पर बने इन प्रतीक्षालयों के निर्माण के समय भी तो निर्माण सम्बंधी अनुमति लोक निर्माण से ही ली गई होगी। लेकिल वर्तमान समय में ये सभी प्रतीक्षालय सब के सब लावारिष हैं।राजमार्ग में कोरारी के पास एक, लोहचा के पास दो, बहुराजमऊ के पास दो, बीघापुर कैंची मोड़ पर एक, अकवाबाद में एक,तहसील मुख्यालय पर एक सहित क्षेत्र में अन्य लगभग आधा दर्जन और भी यात्री प्रतीक्षालय अपनी दुर्दषा को प्रात्प हैं।वहीं लालकुआं में बना प्रतीक्षालय इस समय चर्चा का विशय बना हुआ है।जिसके आधे हिस्से में दुकानदार का कब्जा है तो आधे में पुलिस ने अपनी चैकी बना ली।कुल मिलाकर प्रतीक्षालय का अस्तित्व समाप्त है। वहीं इस सम्बन्ध में जब उपजिलाधिकारी बीघापुर से बात की गई तो उनका बचकाना बयान आया कि इन प्रतीक्षालयों को जिसने बनवाया वह रखरखाव करे अथवा लोकनिर्माण विभाग करे जिसकी जमीन पर बने हुए है।अब सवाल यह भी है कि जिसने बनवाया उनमें से कुछ तो स्वर्ग सिधार गए और कुछ अब यहां से जनप्रतिनिधित्व भी नहीं कर रहे हैं।तो ऐसे में वे लोग इनका रखरखाव कैसे कर सकते हैं।यह बड़ा पेचीदा सवाल बन गया है।

रिपोर्ट – मनोज सिंह

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