ईवीएम में बंद हुई प्रत्यशियों की किस्मत, मतदान विरोध करने वालों को मनाने में अधिकारी हुए कामयाब

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इटावा : प्रत्यासियों के भाग्य का पिटारा ईवीएम मशीनों में बंद हो गया है, किन्तु शहर से लेकर गांव, गली, कूचों तक हर ओर अपने-अपने को जिताने की चर्चाएं जोरो पर है। वही मतदान का विरोध करने वाले गांव के लोग मतदान करके पछता रहे है । जब कि अधिकारी अपनी फजीहत बचाकर काम निकालने में सफल माने जा रहे है।

विधानसभा चुनाव 2017 के लिए भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद हो चुका है । 201विधानसभा भरथना सीट के लिए मतदान बीते दिवस प्रशासनिक व्यवस्था के मुस्तेद रहते कराया गया। 201विधानसभा भरथना सीट पर 9 प्रत्यासी पंजीकृत थे जिन का ब्योरा क्रमस: कमलेश कठेरिया समाजवादी पार्टी, राघवेंद्र गौतम बहुजन समाज पार्टी, डीआर राम भरोसे नेशनल राष्ट्रवादी कांग्रेस, सावित्री कठेरिया भारतीय जनता पार्टी, अरविंद कुमार वंचित समाज पार्टी, धीरेंद्र लोकदल, राजाराम वर्मा, विजय सिंह व विमल गौतम ने अपने अपने भाग्य की आजमाइश के लिए नामांकन करवाया था । मुख्य रूप से प्रचार-प्रसार तीन दलों का ही था, बाकी के 6 प्रत्याशियों की भी कहीं कहीं चर्चाएं थी। रिटर्निंग ऑफिसर राजमणि मिश्रा ने बताया कि भरथना विधानसभा सीट को एहतियातन सुरक्षा की दृष्टि से 6 जोनलों में बांट कर 57 सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाए गए थे। जोनल की मुख्य कमान सुपर जोनल मजिस्ट्रेट के रूप में मुख्य विकास अधिकारी इटावा को सौंपी गई थी। विधानसभा के अंतर्गत एक लाख सात हजार 814 मतदाता थे जिसमें मताधिकार का प्रयोग 58. 97 प्रतिशत ही किया गया। अब मतदान की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद हर गली कूचों में, सड़को और चौराहों पर कार्यकर्ता अपने-अपने दलों के प्रत्याशियों की जीत का दावा ठोक रहे हैं। इतना ही नहीं कहीं कहीं पर तो कार्यकर्ता वाक युद्ध में भी प्रवेश कर जाते हैं। राजनीतिक उठापटक का मूल्यांकन किया जा रहा है। जहां पर सपा के लोग ज्यादा एकत्रित होते हैं वहां पर सपा की जीत व विकास की बातें की जाती हैं । जहां पर बसपा के कार्यकर्ता होते हैं, वहां पर पूर्व शासन काल की और आज के जीत की बातें की जाती हैं। जहां पर भाजपा के कार्यकर्ता होते हैं वहां पर भाजपा की जीत सुनिश्चित की जा रही है। मतदाता भी कम होशियार नहीं है राजनीति करने वालों को भी चकमा देने में कामयाब हैं। जहां पर जो पूछता है मतदाता संख्या व भाव देखकर और उसकी ताकत की आजमाइश देखकर उसी का गुणगान करने लगता है। जब जनपद के जानेमाने राजनैतिक नेता से दूरभाष पर बात हुई तो उन्होंने साफ लहजे में उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि जैसे चकरनगर ब्लॉक के हरिजन आबादी वाले बसपा समर्थकों ने 80 से 90 फीसदी तक लगन दिखाकर मतों का प्रतिशत बढ़ाया, तो वहीं पर सपा कार्यकर्ता विभाजित भी हुआ जिसका लाभ बसपा और भाजपा को मिला, लेकिन वहीं पर सपा और भाजपा के चलते शिथिलता के प्रतिशत करीब 28 तक में ही सिमट कर रह गया। विकास खंड चकरनगर का गांव कांयछी जो एकता बनाकर 11:00 बजे तक चुनाव का बहिष्कार किया गया और चलते प्रशासन के प्रयासों से करीब 11:30 पर पहला वोट किया गया। इस के बाद वहां पर बनी एकता चरमरा गई और चुनाव बिरोध प्रदर्शन नीम के पेड़ पर ही ऊंचा लटका रह गया। फिर क्या लोग आंख बंद करके एक दूसरे की ईर्ष्या चलते मुख्य रूप से तीनों दलों को मतदान किया। यहां भी 314 मतों में से 139 ही मतों का उपयोग किया गया । बाकी आपस में अपना अपना विरोध ही जताने का काम कर पाए । यहां के लोगों का प्रयास था कि चुनाव का वहिष्कार विकास के मुद्दे पर करेंगे। क्योंकि यहां पर विकास का सूर्य 70 साल गुजर जाने के बाद भी पार्टी और प्रशासन रूपी कोहरे में ढका हुआ है। जब तक हमारी मांगे विकास की नहीं मानी जाएंगी तब तक मतदान नहीं करेंगे, पर यह सब 11:30 पर धरा का धरा रह गया और प्रशासनिक अधिकारियों ने दबाव बनाकर लोगों से मतदान करा अपनी फजीहत बचा ली। लेकिन उक्त गांव के ग्रामीणों का विकास एक बार फिर थम गया। अब इस विकास का भगवान ही मालिक है।

रिपोर्ट – सुशील कुमार

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