अपने ही घरों में रहना चाहते है विकासखंड मान्धाता के अधिकारी

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प्रतापगढ़ (ब्यूरो)- जनपद प्रतापगढ़ के विकासखंड मानधाता में लंबे समय से तैनात अपने गृह ब्लॉक में अथवा प्रतापगढ़ जनपद के कई ग्राम विकास अधिकारी तथा सेक्रेटरी विकासखंड मानधाता में अपनी पहुंच के  चलते विकासखंड मानधाता छोड़ना नहीं चाहते हैं सरकार चाहे जो हो चलती इन्हीं की है मनचाहा गांव लिया करते हैं और अपने पसंदीदा कर्मचारियों के दम पर ग्राम प्रधानों के मददगार साबित होते हैं |

जिला स्तर पर यह लोग अपनी पहुंच का फायदा उठाते हैं यदि किसी प्रधान से नहीं भी बनती है तो फिर क्या पूछना गांव का विकास भी बाधित हो सकता है मामला विकासखंड मानधाता के इस नए परिसीमन में कुल 101 ग्राम पंचायत है जिस की सूची  सेक्रेटरी अथवा ग्राम पंचायत अधिकारियों की सूची समाचार के पूर्व भेजी जा चुकी है इसका अंदाजा स्वयं लगाइए कि आखिर यह कर्मचारी विकास खंड मानधाता छोड़कर जाना क्यों नहीं चाहते हैं यह भी बहुत बड़ा कारण है कई समाजसेवियों ने इसकी निष्पक्षता से जांच कराए जाने की मांग किया है  |

जनपद स्तर के अधिकारी इनके ऊपर नजर डाले तो दूध का दूध पानी का पानी जरूर होगा विकासखंड मानधाता के 49 ग्राम पंचायतों को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ओडीएफ घोषित किया जा चुका है शौचालय का उपयोग गांव की जनता जनार्दन शत प्रतिशत उपयोग करें खुले में शौच ना जाए यही स्वच्छता मिशन की कामयाबी है रही बात गांव की गलियों में जाकर इसकी भी पड़ताल आवश्यक है क्या धरातल पर सरकार के पैसे का उपयोग हो रहा है कि नहीं हो रहा है यह भी जांच का विषय है  |

यहां आपको बता दें कि मानधाता विकासखंड के ग्राम प्रधानों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अधिकारी कर्मचारियों के ऊपर 10% अथवा 20% कमीशन लेने का खुल्लम खुल्ला विरोध किया था इस विरोध का शासन प्रशासन ने संज्ञान लेकर खंड विकास अधिकारी का तबादला कर दिया गया उनके स्थान पर नए खंड विकास अधिकारी की तैनाती भी हो चुकी है |

अब देखना यह है कि विकासखंड मानधाता से भ्रष्टाचार खत्म होता है या नहीं रही बात विकास की तो विकास भी गांव का होना चाहिए यदि केंद्र सरकार प्रदेश सरकार द्वारा भेजा गया धन गांव में जनहित के विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा तो आने वाला समय भारत के गांव का होगा |

रिपोर्ट-अवनीश कुमार मिश्रा

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