पानी में डूबी पिक-अप, बड़ा हादसा टला, रेत के लिए नदी में उतारा गया था माजदा को

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अंबागढ़ चौकी(छत्तीसगढ़)- 31 मार्च को मोंगरा बैराज से छोड़े गए पानी में एक अवैध रेत उत्खनन कर रही माजदा पानी के बहाव में डूब गई । ग्राम कान्हे के रास्ते से रेत चोरो ने रास्ता बनाकर खेतों से नदी तक रास्ता बनाया और रात दिन शिवनाथ नदी से रेत चोरी को अंजाम दिया| जहाँ से रेत निकाली जा रही थी वह ग्राम धानापापायली की सरहद थी| किसानों की पानी की मांग को देखते हुए मोंगरा बैराज प्रबन्धक ने 31 मार्च को पानी छोड़ा था| रेत उत्खनन करने वालों ने आसपास के कई ठिकानो में भारी मात्रा में रेत भी डंप करके रखी हुई है| कई बार खनिज अधिकारियों को इस छेत्र में रेत उत्तखनन की शिकायत मोबाईल द्वारा की गई लेकिन खनिज अधिकारियो द्वारा रेत चोरो के ऊपर बड़ी कार्यवाही आज तक देखने को नही मिली|

स्वराज माजदा नदी से रेत उत्खनन के लिए उतरी थी| अगर समय रहते ड्राइवर और उसमें मौजूद मजदूर पानी के बहाव को अपने तरफ बढ़ते पानी को नहीं देखते तो बहुत बड़ा हादसा हो जाता| मोंगरा बैराज से छोड़े गए पानी के बहाव को अपने ओर आते देख ड्राइवर व मजदूर सब कुछ छोड़ अपनी जान बचाने को शिवनाथ से बाहर निकल गए|

यह स्वराज माजदा किसी मुन्ना नाम के व्यक्ति की बताई जा रही है जो कि रेत भरने के लिए कान्हें और खेतों के रास्ते से इस शिवनाथ नदी तक अपनी गाड़ी को लाया था । बताया तो यह भी जा रहा कि इस रास्ते का ज्यादा उपयोग रेत निकालने के लिए ही किया गया| यह स्वराज माजदा नदी के बीचों बीच अभी फंसी हुई है| रेत उत्खनन करने वाले तो इन क्षेत्रो से दिनदहाड़े भी शिवनाथ नदी तट से रेत निकालते है|

जाँच का विषय तो यह है कि अगर इस रेत निकालने वाली माजदा के लोग हादसे का शिकार हो जाते तो इसका जिम्मेदार कौन होता ? क्या भानु होता या कोई और या खुद माजदा सवार लोग ? मोंगरा बैराज के एसडीओ एमएस छाबड़ा ने बताया कि किसानों के खेत सूख रहे थे इसलिए किसानों ने हमसे पानी की मांग की थी| इस मांग को देखते हुए मोंगरा बैराज से पानी छोड़ा गया|

रिपोर्ट- हरदीप छाबड़ा
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