जल एक अमूल्य निधि है

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पानी हमारे जीवन का सबसे अहम् हिस्सा और इसे ही हम सबसे ज्यादा बर्बाद कर रहे है |लाखों ऐसे लोग हैं जिन्हें प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति की दर से 20 लीटर साफ पानी भी उपलब्ध नहीं है |

Water Problem in Ulhasnagar Saraswati Nagar Near Pawoi  Chowk .So Residence provided water by Tanker   Photo by Rishikesh Choudhary

 

ये कुछ आसन तरीके हैं जिनसे हम इस अमूल्य निधि को बचा सकते हैं

*  स्नान करते समय `शावर’ से `टब´ की तुलना में बहुत जल बचाया जा सकता है

पानी बचाएं १

* नल को ठीक से बंद करें, सुबह ब्रश करते वक़्त ही अगर हम नल को बंद रखकर ब्रश करें तो 8 गैलन पानी रोज बचा सकते हैं, महीने में करीब 250 गैलन |

पानी बचाएं ३

* गाड़ियों को धोने के लिए पाइप की जगह बाल्टी और स्पंज का प्रयोग करें |

पानी बचाएं

 

*  प्रत्येक घर की छत पर ` वर्षा जल´ का भंडार करने के लिए एक या दो टंकी बनाई जाएँ और इन्हें मजबूत जाली या फिल्टर कपड़े से ढ़क दिया जाए तो हर नगर में `जल संरक्षण´ किया जा सकेगा।

जल संरक्षण

* घरों, मुहल्लों और सार्वजनिक पार्कों, स्कूलों अस्पतालों, दुकानों, मन्दिरों आदि में लगी नल की टोंटियाँ खुली या टूटी रहती हैं, तो अनजाने ही प्रतिदिन हजारों लीटर जल बेकार हो जाता है। इन टोटियों को तुरंत ठीक करवाएं |

पानी बचाएं 2

* गंगा और यमुना जैसी सदानीरा बड़ी नदियों की नियमित सफाई बेहद जरूरी है। नगरों और महानगरों का गन्दा पानी ऐसी नदियों में जाकर प्रदूषण बढ़ाता है, जिससे मछलियाँ आदि मर जाती हैं और यह प्रदूषण लगातार बढ़ता ही चला जाता है। हमे इन नदियों में कूड़ा कचरा नही फेकना चाहिए

गंगा सफाई

* जंगलों का कटान होने से दोहरा नुकसान हो रहा है। पहला यह कि वाष्पीकरण न होने से वर्षा नहीं हो पाती और दूसरे भूमिगत जल सूखता जाता हैं। बढ़ती जनसंख्या और औद्योगीकरण के कारण जंगल और वृक्षों के अंधाधुंध कटान से भूमि की नमी लगातार कम होती जा रही है, इसलिए वृक्षारोपण लगातार किया जाना जरूरी है।

वृक्षारोपण

 

पानी का `दुरूपयोग´ हर स्तर पर कानून के द्वारा, प्रचार माध्यमों से कारगर प्रचार करके और विद्यालयों में `पर्यावरण´ की ही तरह `जल संरक्षण´ विषय को अनिवार्य रूप से पढ़ा कर रोका जाना बेहद जरूरी है।

 

 

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