साढे 13 लाख जवानों की मजबूत सेना शांति का उपदेश देने के लिए नहीं है

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Parrikar addresses media

दिल्ली- आजकल पाकिस्तान को जब देखों भारत के खिलाफ ज़हर उगलने से बाज नहीं आ रहा है, जब से भारत एनएसजी समूह के लिए आवेदन किया है तभी से पाकिस्तान ने इसे अपना प्रमुख उद्देश्य बना लिया था कि किसी भी कीमत पर भारत को एनएसजी की सदस्यता नहीं मिलनी चाहिए इसके लिए पाकिस्तान और उसके एकमात्र समर्थक देश चीन ने भी अच्छी खासी मेहनत की हालाँकि इन दोनों की इतनी मेहनत के बावजूद एनएसजी में तो नहीं लेकिन एमटीसीआर ग्रुप का सदस्य बन गया | आपको बता दें कि एक बार हाल ही में ऐसा भी हुआ है जब भारत के रक्षा मंत्री के बयान से हिल गया था पूरा पाकिस्तान –

साढे 13 लाख जवानों की मजबूत सेना शांति का पाठ पढ़ाने के लिए नहीं है –
केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री मनोहर परिर्कर को उनकी स्पस्टवादिता के लिए जाना जाता है | रक्षामंत्री मनोहर परिर्कर ने बीते कुछ दिनों पहले लगातार देश में हो रहे आतंकी हमलों का जवाब देते हुए बेहद सख्त लहजे में कहा था कि, ‘साढ़े 13 लाख जवानों से सुसज्जित मजबूत सेना शांति का पाठ पढ़ाने के लिए नहीं है |’ उन्होंने सीधे लहजे में कहा था कि आतंकी जिस भाषा में समझना चाहते है उन्हें उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा |

आतंकियों को मारने के लिए हम क्यों आतंकी नहीं भेज सकते –
रक्षा मंत्री ने बेहद सख्त लहजा अख्तियार करते हुए यह भी कहा था कि हमें आतंकियों को समाप्त करने के लिए आतंकियों को ही भेजना पड़ेगा तो हम भेजेंगे | उन्होंने कहा कि अगर वे ऐसा कर सकते है तो हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते है |

मै अपने देश की रक्षा करने के लिए किसी भी हद तक जाऊँगा –
पर्रिकर ने कहा, ‘मुझे अपने देश की रक्षा करनी है. ऐसा करने के लिए मैं किसी भी सीमा तक जा सकता हूं | जो करना है उसे किया जाएगा |’ रक्षा मंत्री ने कहा, ‘अगर मेरे देश को कोई नुकसान पहुंचाएगा तो मुझे उससे पहले ही कार्रवाई करनी होगी | सेना का मुख्य मक़सद होता है अगर आप पर कोई हमला करे तो आप वापस हमला कीजिए | उसी भाषा में जवाब दीजिए |

जो जिस भाषा में समझता है उसे उसी की भाषा में जवाब दीजिये –
रक्षा मंत्री श्री मनोहर परिर्कर ने कहा था कि अगर आपके ऊपर कोई एक गोली चलाता है तो आप उसे मार दीजिये | वह बच कर जाना नहीं चाहिए | परिकर ने जोर देकर कहा था कि कोई आपके ऊपर हमला करता है तो आप उसे बक्शिये नहीं उसका सफाया कर दीजिये लेकिन मानवता को ध्यान में रखते हुए |

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