हम संविधान में किसी भी प्रकार का संसोधन नहीं चाहते है – मुलायम सिंह यादव (समाजवादी पार्टी)

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संविधान दिवस की चर्चा के दौरान आज बोलते हुए सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि लोग आज संविधान में संसोधन की बात केवल अपने निजी फायदे के लिए करते है I उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के संविधान में संसोधन की बात की निंदा करते हुए कहा है कि हम इस संसोधन की खिलाफत करते है और इतना ही नहीं हम इसकी निंदा भी करते है I

अपने भाषण के दौरान सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि क्या आज संसद में बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर, डाक्टर. राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरु और सरदार पटेल से अधिक बुद्धिमान लोग आ गए है जो आज यह लोग संविधान में संसोधन की बात कर रहे है I मुलायम सिंह यादव ने अपनी बात को सही साबित करते हुए कहा है कि मेरे गुरु डाक्टर राममनोहर लोहिया जी भी संविधान में संसोधन की खिलाफत करते थे और इसीलिए मै भी आज संविधान संसोधन के खिलाफ हूँ I

समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी के ऊपर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह लोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थ की खातिर संविधान में संसोधन की बात कर रहे है I मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन से भी कहा कि मै और मेरी पार्टी ऐसा चाहती है कि संविधान के संसोधन के कार्य को जितना जल्दी हो सके बंद किया जाना चाहिए I

библиотека тгу электронный каталог बाबा साहब अंबेडकर संविधान में संसोधन की बात कही थी –

जिस समय भारत का संविधान बन कर तैयार हो चुका था उसके बाद कही बातचीत के दौरान बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने खुद ही कहा था कि यदि मेरा बस चलता तो मै इस संविधान को फाड़कर जला देता उन्होंने ऐसा भी कहा था कि मैंने इसी लिए संविधान में भी इस बात को लिख दिया है कि समय-समय पर संविधान में आवश्यकता पड़ने पर जितने भी आवश्यक हो संसोधन होते रहने चाहिए I लेकिन आज जब हाल ही में भारत सरकार बाबा साहब की 125 वीं जयंती मनाने की तैयारी कर रही है तो ऐसे में मुलायम सिंह यादव सरीखे बड़े नेताओं के इस तरह के बयान क्या रंग दिखायेंगे यह मजे की बात है I

सबसे बड़े आश्चर्य की बात तो यह है कि जिस बात को बाबा साहब भीमराव ने स्वयं कहा था कि समय के बदलते स्वरूप के साथ ही साथ संविधान को भी बदलना आवश्यक होगा तो आज उन्ही के द्वारा कही हुई बातों को देश की बाकी की पार्टियाँ नकारने में क्यों लगी हुई है I हालाँकि मुलायम सिंह यादव ने यह भी कहा है कि यदि संविधान में संसोधन करना ही चाहते है तो जनमत संग्रह करवा लीजिये और यदि जनता यह चाहती है कि संविधान में संसोधन होना चाहिए तो ही संविधान में संसोधन करिए अन्यथा नहीं I

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