जाने क्या है अयोध्या विवाद, मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज…

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अयोध्या- अयोध्या विवाद सालो से जिस मुदुदे का हल नही निकल पाया. सरकारे बदल गई मगर इस मुद्दे का हल नही निकल सका. जवाहर लाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी के बाद अटल बिहारी बाजपेयी और अब देश के भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या मुदुदे के हल का आश्वासन देकर अपनी झोली में वोट डलवाकर सरकारे तो बनाते रहे है मगर इस समस्या का हल आज तक नही निकल पाया.

आखिर क्या है अयोध्या विवाद-

1853 में इस जगह के आसपास पहली बार दंगे हुए. 1859 में अंग्रेजी प्रशासन ने विवादित जगह के आसपास बाड़ लगा दी. मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की इजाजत दी गई. फरवरी 1885 में महंत रघुबर दास ने फैजाबाद के उप-जज के सामने याचिका दायर की कि यहां मंदिर बनाने की इजाजत दी जाए. जज पंडित हरिकृष्ण ने यह कहकर इसे खारिज कर दिया कि यह चबूतरा पहले से मौजूद मस्जिद के इतना करीब है कि इस पर मंदिर बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती. असली विवाद शुरू हुआ 23 दिसंबर 1949 को, जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं. हिंदुओं का कहना था कि यहां भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुसलमानों ने आरोप लगाया कि किसी ने रात में चुपचाप मूर्तियां वहां रख दीं.

इसके बाद प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री जी. बी. पंत से इस मामले में फौरन कार्रवाई करने को कहा. यूपी सरकार ने मूर्तियां हटाने का आदेश दिया लेकिन जिला मैजिस्ट्रेट के. के. नायर ने दंगों और हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के डर से इस आदेश को पूरा करने से इंकार कर दिया. बता दें कि नायर के बारे में माना जाता है कि वह कट्टर हिंदू थे और मूर्तियां रखवाने में उनकी पत्नी शकुंतला नायर का भी रोल था.
परिणाम स्वरूप सरकार ने इसे विवादित ढांचा मानकर ताला लगवा दिया. 16 जनवरी 1950 को गोपाल सिंह विशारद नामक शख्स ने फैजाबाद के सिविल जज के सामने अर्जी दाखिल कर यहां पूजा की इजाजत मांगी. उस वक्त के सिविल जज एन. एन. चंदा ने इजाजत दे दी. मुसलमानों ने इस फैसले के खिलाफ अर्जी दायर की. विवादित ढांचे की जगह मंदिर बनाने के लिए 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने एक कमेटी गठित की. यू. सी. पांडे की याचिका पर फैजाबाद के जिला जज के. एम. पांडे ने 1 फरवरी 1986 को हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत देते हुए ढांचे पर से ताला हटाने का आदेश दिया. इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया गया. 06 दिसंबर 1992 को बीजेपी, वीएचपी और शिवसेना समेत दूसरे हिंदू संगठनों के लाखों कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को गिरा दिया. देश भर में हिंदू-मुसलमानों के बीच दंगे भड़के गए, जिनमें करीब 2,000 लोग मारे गए.
इस मामले पर कई बार कई फैसले आए. मगर क्योंकि यह फैसला संप्रदाय, हिंदू मुस्लिम आस्था से जुड़ा हुआ है हरबार कोई भी फैसला कभी मुस्लिमों तो कभी हिंदुओं ने सिरे से खारिज कर दिया.

मोदी सरकार का सरदर्द बना अयोध्या विवाद-

मोदी सरकार में इस बात पर जोर दिया कि यहां मंदिर का निर्माण होकर रहेगा जिसके बाद लाखो हिंदुओ का मोदी सरकार पर भरोसा बढ़ गया. मोदी के लिए फैसला आसान नहीं है. अगर वह मंदिर निर्माण की ओर कदम बढ़ाते हैं तो उनके समर्थक, खासकर हिंदू कट्टरपंथी बेशक बेहद खुश होंगे लेकिन उसके बाद देश में शांति बनाए रखना एक चुनौती बन जाएगी. 1992 में जब बाबरी मस्जिद गिराई गई थी तो भारत ने भयानक दंगे देखे थे जिनमें हजारों लोगों मारे गए थे. और उसके बाद देश के भीतर कई आतंकवादी संगठन भी खड़े हुए. अशांति पसरते ही आर्थिक विकास रुक जाएगा.

अयोध्या मामले पर सुनवाई आज-

अयोध्या विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है. ऐसा माना जा रहा है कि कोर्ट में आज लगातार सुनवाई की तारीख तय हो सकती है. 8 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में लगातार सुनवाई की तारीख तय होने का अऩुमान था लेकिन सुन्नी वक्फ बोर्ड ने उन किताबों का का अनुवाद मांगा था जिनके अंश हिंदू पक्ष अपनी दलील में रख रहे थे. दोनों पक्षों का कहना है कि अनुवाद के दस्तावेज के लेन देन का काम पूरा हो चुका है.

आठ फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में भी ऐसा माना जा रहा था कि लगातार सुनवाई की तारीख तय हो सकती है लेकिन उस दिन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने उन किताबों का अनुवाद मांग लिया, जिनके अंश हिन्दू पक्ष अपनी दलीलों के दौरान पढ़ेगा. इस मांग के चलते चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और एस अब्दुल नज़ीर की बेंच ने सुनवाई टाल दी. कोर्ट ने हिन्दू पक्ष से कहा कि वो गीता, रामचरितमानस, पुराण, उपनिषद जैसे ग्रंथों के जिन हिस्सों को कोर्ट में रखना चाहता है, उनका अंग्रेज़ी अनुवाद मुस्लिम पक्ष को दे. दोनों पक्षों के वकीलों ने बताया है कि दस्तावेजों के अनुवाद और लेन-देन का काम पूरा हो चुका है.

ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि या तो आज बहस की औपचारिक शुरुआत होगी या नियमित सुनवाई को तारीख तय होगी. अब तक इस मामले को सुन रहे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर हो जाएंगे. ऐसे में अगर कोर्ट अगर लगातार सुनवाई शुरू करता है तो मामले का फैसला सितंबर के अंत तक आ सकता है.

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