जब अर्जुन को अकेले ही भोगना पड़ा था 12 वर्षों का वनवास

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arjun's vanvas

जैसा कि सभी जानते है कि पाँचों पांडवों की एक सबसे बड़ी रानी थी द्रौपदी ! महाराजा द्रुपद की कन्या जिसका वरण अर्जुन से स्वयंवर में विजय प्राप्त करके की थी I लेकिन बाद में द्रौपदी पर पाँचों भाइयों का अधिकार हो गया I जो कि कहा जाता है कि भगवान् शंकर के पूर्व जन्म द्रौपदी को दिए गए आशीर्वाद का फल था |

द्रौपदी थी तो पाँचों पांडवों की रानी लेकिन वह एक प्रत्येक के साथ एक वर्ष तक ही रहा करती थी और जब वह एक किसी भी चाहे वह कोई भी युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल, सहदेव इनमे से किसी के साथ हो तो अन्य कोई उनकी तरफ नजर उठा कर देख नहीं सकता था I बाकी अन्य भाइयों के लिए उस समय वह देवी की तरह से रहा करती थी |

लेकिन एक बार जब द्रौपदी युधिष्ठिर के साथ रह रही थी तभी अर्जुन कुछ डाकुओं को सबक सिखाने के लिए अपने धनुष को लेने के लिए गए और क्रोध में उन्हें इस बात का आभास नहीं रहा कि इस समय द्रौपदी के साथ महाराज युधिष्ठिर है और वह सीधे कक्ष के भीतर चले गए I

अर्जुन ने उन डाकुओं को तो भगा दिया लेकिन जब वापस आये तो उन्हें 12 वर्षों के पूर्वनिर्धारित वनवास पर जाना पड़ा I

12 वर्ष के वनवास के दौरान अर्जुन ने किये तीन विवाह –

जब अर्जुन को सब कुछ छोड़ कर वनवास जाना पड़ा था तो उन्होंने इस 12 वर्षों के वनवास के दौरान तीन विवाह किये जिसमें से एक चित्रांगदा चित्रांगदा (मणिपुरा), उलूपी (नागा) और सुभद्रा (जो कि स्वयं भगवान् श्री कृष्ण की ही बहन थी) I इसी नाग कन्या उलूपी और अर्जुन के संसर्ग से जिस पुत्र का जन्म हुआ था उसका नाम था इरावन I और जब महाभारत के युद्ध में किसी एक राजकुमार की स्वैच्छिक नर बलि की जरुरत पड़ी तो इरावन  ने ही अपनी बलि दी थी।

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