जब समझ मे न आए, दबाओं “नोटा”

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प्रतीकात्मक


गोरखपुर (ब्यूरो)
-मतदान के लिए निर्वाचन आयोग से लेकर स्वंय सेवी संस्थाए तक प्रेरित करती है,लेकिन मतदाताओ के सामने कभी-कभी एेसी विषम स्थति आ जाती है कि चुनाव मैदान मे उतरा कोई प्रत्याशी पसन्द नही होता है इन स्थितियों के कारण वह वोट डालने से कतराता है|अपराधिक या विवादित छवि के इन प्रत्याशियों के क्षेत्र के मतदाता न चाहते हुए वोट देते थे या फिर किसी एैसे निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष मे मताधिकार कर देते है जो डमी प्रत्याशी के रूप मे चुनाव मैदान मे उकरते है और उनका कोई अस्तित्व नही होता है|मतदाताओ की परेशानी को भापते हुए निर्वाचन आयोग ने”नोटा””इनमे से कोई नही”का विकल्प तलाशा और उसे २०१४ के लोकसभा चुनाव से लागू कर दिया|

अब प्रत्याशियों के सामने विकल्प खुला रहता है कि यदि उन्हे अपने क्षेत्र का कोई प्रत्याशी पसन्द नही है तो वह बड़े गर्व के साथ”नोटा”का बटन दबा कर नकार सकता है| किसी भी चुनाव का मतदाता प्रतिशत बढ़ाने के लिए पूरे प्रयास किये जाते है इसके लिए कई तरह के मतदाता जागरूकता अभियान भी चलाये जाते है ताकि मतदाताओ को मतदान केन्द्र तक पहुचांया जा सके|

रिपोर्ट-जयप्रकाश यादव

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