जब महामहिम राष्ट्रपति डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने लगायी चालाक पाकिस्तानी सैनिक तानाशाह परवेज मुशर्रफ की क्लास

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भारत रत्न डाक्टर श्री कलाम परवेज मुशर्रफ को पूरा के बारे में समझाते हुए (photo credit-PIB)
भारत रत्न डाक्टर श्री कलाम परवेज मुशर्रफ को पूरा के बारे में समझाते हुए (photo credit-PIB)

देश के महान वैज्ञानिक और पूर्वराष्ट्रपति भारत रत्न ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अब हमारे साथ नही रहे लेकिन शताब्दियों तक भारत के लोगों के ज़हन में वह जीवित रहेंगे I उनकी यादें रह-रह कर उनसे जुडें हुए लोगों को गमगीन कर जाती हैं I हर कोई अब उनके साथ गुजारे अपने पलों को याद कर गमगीन हो रहा हैं I

ऐसे में आदरणीय भारत रत्न ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के उस समय सलाहकार रहे बी.एम. नायर ने उस महान ब्यक्ति के साथ गुजारे हुए पलों को याद करते हुए अपनी किताब में इस बात का जिक्र किया हैं कि पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति सैनिक तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ को किस तरह से सीधे साधे संत दिखने वाले भारत रत्न ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कूटनैतिक तरीके से लेक्चर दिया था I और पाकिस्तान का यह सैनिक तानाशाह चुपचाप बस उन्हें सुनता ही रह गया और कुछ न बोल सका I

यह घटना हैं वर्ष 2005 अप्रैल के महीने की जब पाकिस्तान के सैनिक तानाशाह और उस समय के तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ भारत दौरे पर आये हुए थे I परवेज ने भारत दौरे पर आने के बाद देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह से मुलकात की और उसके बाद उन्होंने देश के तत्कालीन राष्ट्रपति भारत रत्न श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से भी मिलने की इच्छा जाहिर की I उनका कार्यक्रम तय कर दिया गया था I

जिस दिन परवेज मुशर्रफ को आदरणीय कलाम साहब से मिलने के लिए आना था उससे एक दिन पहले डाक्टर कलाम साहब के सचिव बी.एम. नायर कलाम साहब को ब्रीफ करने के लिए उनके पास पहुंचे और कहा कि, “सर कल जनरल परवेज मुशर्रफ आप से मिलने के लिए आ रहे हैं” I

कलाम साहब ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हा मुझे पता हैं कि वह आ रहे हैं” I

इस पर कलाम साहब के सचिव रहे बी.एम. नायर ने कहा कि, “सर आप जानते हैं कि वह कितने अधिक कूटनैतिक ब्यक्ति हैं ? आपको उसके लिए तैयार रहना चाहिए ! मैं यहाँ आपको इसीलिए ब्रीफ करने के वास्ते आया हूँ I”

भारत रत्न ने एक बार फिर से अपनी नजर उठाते हुए मंद-मंद मुस्कुराते हुए अपने चिर-परिचित अंदाज में बोले, “आप इसके लिए निश्चिंत रहिये मैं सब संभाल लूँगा” I

बी.एम. नायर साहब अब तक इतने दिनों साथ रहते हुए इतना तो समझ ही चुके थे कि अब वास्तव में ही यह परवेज मुशर्रफ को संभाल लेंगे और वह वहां से बाहर निकल गए I

अगले दिन की मुलकात

अगली सुबह ठीक 7:30 बजे जनरल परवेज मुशर्रफ अपने पूरे काफिले के साथ राष्ट्रपति भवन पहुँच गए I स्वयं महामहिम राष्ट्रपति भारत रत्न ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने उनका स्वागत किया और उन्हें राष्ट्रपति भवन के उत्तर दिशा में बने पहली मंजिल के ड्राईंग रूम में ले जाया गया I

और महामहिम राष्ट्रपति डाक्टर कलाम आये और जनरल परवेज मुशर्रफ के दायी ओर कुर्शी डाल कर बैठ गए I महामिम राष्ट्रपति के साथ जनरल परवेज मुशर्रफ के की मुलाकात का वक्त 30 का तय किया गया था जोकि पहले से ही तय था I

भारत रत्न कलाम साहब ने बोलना शुरू किया और बोले, “राष्ट्रपति महोदय भारत और पाकिस्तान दोनों ही विकास शील देश हैं और हमारे देश की ही तरह से आपके यहाँ भी गरीब और मलिन बस्तियां होंगी, लोग होंगे ? आपको नहीं लगता कि हम सभी को उनके लिए जो कुछ संभव हो, जो हम कर सकते हैं वह करना चाहिए ?

पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने कहा, “हा” I और वह कह भी क्या सकते थे ? उनके पास इसके अलावा और कोई विकल्प भी नहीं था I

भारत रत्न डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पाकिस्तानी सैनिक तानाशाह से हाथ मिलाते हुए
भारत रत्न डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पाकिस्तानी सैनिक तानाशाह से हाथ मिलाते हुए (Photo credit-PIB)

और जनरल परवेज मुशर्रफ का “हा” कहना ही बस था डाक्टर कलाम के लिए, बस इतने से शब्दों पर ही उन्होंने दिखा दिया कि वह कितने बड़े कूटनैतिक राजनेता हैं और राजनीति की समझ उन्हें किस कदर हैं ?

डाक्टर कलाम साहब ने बोलना शुरू किया, उन्होंने परवेज मुशर्रफ से कहा, “आज मैं आपको “पूरा” के बारे में विस्तृत जानकारी दूंगा I पूरा का मतलब है प्रोवाइंडिंग अर्बन फ़ैसेलिटीज़ टू रूरल एरियाज़.”

और तुरंत ही बगल में लगी स्क्रीन पर कुछ हरकत दिखायी पड़ी और डाक्टर कलाम साहब ने एक के बाद एक अलग-अलग स्टेप में पूरा से सम्बंधित पूरी जानकारी जनरल परवेज मुशर्रफ को दे दी I इस पूरे वक्त में तक़रीबन 26 मिनट का वक्त कब बीत गया कुछ पता ही नहीं चला I भारत रत्न ने बहुत ही आराम से जनरल परवेज मुशर्रफ को समझाया कि पूरा का क्या मतलब हैं और अगले 20 सालों में दोनों देश किस तरह से इस बड़े टारगेट को अचीव कर सकते हैं ? कैसे दोनों ही देश अपने देश के गरीब वर्ग का भला कर सकते हैं ?

अब तक तीस मिनट का वक्त पूरा हो चुका था और अब मुशर्रफ के जाने का वक्त आ गया था I मुशर्रफ धीरे से उठे और बोले, “ धन्यवाद राष्ट्रपति महोदय, भारत बहुत ही भाग्यशाली राष्ट्र हैं क्योंकि उसके पास आप जैसा एक वैज्ञानिक राष्ट्रपति हैं” I

मुशर्रफ ने महामहिम राष्ट्रपति डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से हाथ मिलाया और निकल लिए I यह सब देख पीछे बैठे हुए सचिव आवाक रह गए और उस दिन बी.एम. नायर ने अपनी डायरी में लिखा कि आज डाक्टर कलाम ने यह साबित कर दिया हैं कि एक वैज्ञानिक भी अच्छा राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ हो सकता हैं I”

 

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