जब भी दर्द से मै “माँ” चिल्लाया, उन्होंने बिजली के झटके बढ़ा दिए

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जब मै 14 साल का था इस्लामिक स्टेट वालों ने मुझे पकड़ लिया था, मुझे लगने लगा था कि अब मै कभी अपने परिवार और दोस्तों से नही मिल पाउँगा, वो खुद को धार्मिक कहते हैं और कहते है वो जो भी कर वो इस्लाम के लिए कर रहे हैं लेकिन वास्तव में वो काफिर हैं, वो नशा करते हैं हिंसा करते हैं और बलात्कार भी……….. जब तक मै वो मुझे मारते थे, बिजली के झटके देते थे और जब भी मै माँ को याद करके चिल्लाता वो बिजली का वोल्टेज बढ़ा देते, खुद को धर्म का मसीहा बताने वाले ये लोग जानवरों से भी ज्यादा बदतर और राक्षसों से भी ज्यादा क्रूर हैं

isisi

आज भी उन लम्हों को याद करके मै कांप जाता हूँ, रात को ठीक से नींद नही आती डरावने सपने आते हैं, मैंने बहुत इलाज भी करवाया पर वो कभी न मिट पाने वाली डरावनी यादें हर पल मुझे बेचैन करती हैं और मै खुदा से हर दुआ में इंसानियत के इन दुश्मनो के खात्मे की ही इल्तजा करता हूँ।

 

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