जब सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कहा, काश मौलाना कांग्रेस की बजाय मुस्लिम लीग में होते तो भारत का बँटवारा शायद न होता

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मौलाना अबुल कालाम आज़ाद अगर कांग्रेस की बजाय मुश्लिम लीग में होते शायद भारत का बंटवारा न होता –

सरदार वल्लभ भाई पटेल और मौलाना अब्दुल कलाम
सरदार वल्लभ भाई पटेल और मौलाना अब्दुल कलाम

मौलाना अबुल कालाम आज़ाद भारत में हिन्दू-मुश्लिम एकता का एक ऐसा नाम जिसके बारे में कुछ भी कहना काफी कठिन होता हैं लेकिन कभी-कभी हमारे महापुरुषों से भी कुछ गलतियाँ हो ही जाती हैं और उन्हें सबके सामने इस उद्देश्य से रखा जाता हैं जिससे आने वाले समय में यह गलतियाँ दोहराई न जा सकें, ऐसी ही एक गलती मौलाना अबुल कालाम आज़ाद से भी अनजाने में ही सही पर हुई थी ……..

बात आजादी के पहले की हैं जब द्वतीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ था और इंग्लैण्ड में विन्सटन चर्चिल के युग का अंत हुआ था और लेबर पार्टी सत्ता में आई थी क्लेमेंट एटली नए प्रधानमंत्री बने थे, इससे पहले लेबर पार्टी के साथ और कई बड़े नेता भी यह घोषणा कर चुके थे की युद्ध के बाद वह हिन्दुस्तान को स्वराज देने के लिए उचित कार्यवाही करेंगे, और ऐसा उन्होंने किया भी……

सत्ता में आते ही एटली की सरकार ने हिन्दुस्तान की आज़ादी के लिए काम करना प्रारंभ भी कर दिया, इसमें सबसे पहला कदम सभी केन्द्रीय असेंबली और प्रांतीय असेम्बलियों को पुनर्जीवित करने के लिए आम चुनाव करवाना था, जिसमें तमाम कारणों की वजह से भारत के केवल ३.५ करोंड मतदाता ही भाग ले सकते थे ….

सरदार वल्लभ भाई पटेल
सरदार वल्लभ भाई पटेल

इसके बावजूद तमाम राजनैतिक पार्टियों ने इसमें भाग लिया और जो पूर्व निर्धारित था वैसे निर्णय भी आये, जहाँ मुश्लिम बाहुल्य था वहां की तमाम सीटों पर मुश्लिम लीग और गैर मुश्लिम पर कांग्रेस को जीत मिली ….

सरदार पटेल उस समय कांग्रेस के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष थे जैसे ही चुनाव के परिणाम घोषित हुए उनकी नजर में सबसे पहले बात आई कि सिंध जो आज पाकिस्तान का हिस्सा हैं वहां की ६० सीटों के चुनाव में मुश्लिम लीग को २७, कांग्रेस को २२ और बगावत कर मुश्लिम लीग और जिन्ना से अलग हुए अल्लाह बख्स को ५ और अन्य को ५ सीटें मिली…

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने तुरंत सोचा कि सिंध मुश्लिम लीग का सबसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हैं, साथ ही पंजाब तथा बंगाल में जिन्ना के विरोधी बहुत कुपित थे, सिंध में मुश्लिम लीग को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था, ऐसी स्थति में बाहरी सहयोग के बिना लीग की सरकार बन पाना मुस्किल था …

सरदार ने अपने दिमाग में योजना बनाई की लीग और जिन्ना के विरोधी अल्लाह बख्स को और उनके साथियों को साथ मिलकर कांग्रेस अगर सिंध में सरकार बनाये तो मुस्लिम लीग को सरकार बनाने से रोका जा सकता हैं…

इसके लिए अगर जरूरी पड़े तो अल्लाह बख्स को सरकार बनाने दो और कांग्रेस बहार से उसे अपना समर्थन दे दें….

अगर सरदार की यह युक्ति काम आ जाती तो जिन्ना के पकिस्तान को वहीँ पकिस्तान की संभावित राजधानी कंराची में ही दफ़न किया जा सकता था और देश का विभाजन कभी न होता और न ही इतने लोग कभी मारे जाते और न ही बेघर होते ….

लेकिन सरदार ने जिस दिन अपनी इस निति को लागू करने की गति को तेज किया उसी दिन रात में आकाश वाणी पर से प्रसारित जो समाचार उन्होंने सुने, उसे सुनकर वे स्तब्ध रह गए और इतना ही नहीं हमेशा समान भाव से रहने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल क्षण भर के लिए असमान और अस्वस्थ हो गए…

सरदार पटेल और मौलाना आज़ाद
सरदार पटेल और मौलाना आज़ाद

मौलाना अबुल कालाम आज़ाद उस समय कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष थे, कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने बयान दिया कि कांग्रेस सिंध में सरकार बनाने का कोई भी दावा पेश नहीं करेगी और न ही किसी भी पार्टी को समर्थन ही देगी, यह समाचार सुनकर सरदार कुछ छण के लिए मौन वहीँ बैठे रहे ….

मणिबहन जो कि सरदार की बेटी थी जो अक्सर सरदार के साथ रहा करती थी उन्होंने अपने पिता की यह हालत देखकर उनसे पूछा कि ….

क्या हुआ बापू …? अब तो देश में अधिकांशतः कांग्रेस की ही सरकार बनने वाली और केन्द्रीय असेंबली में भी कांग्रेस को भारी बहुमत मिला हुआ हैं फिर आप क्यू इतना परेशान हैं ….?

मणिबहन …! सरदार साहब ने कहा …..आज ऐसा हुआ हैं कि मौलाना अबुल कालाम आज़ाद कांग्रेस के बजाय मुश्लिम लीग के अध्यक्ष बने होते तो पूरे देश को भारी फायदा हुआ होता ….

ऐसा क्यू कह रहे हैं बापू, मणिबहन ने पूछा …?

बाएं से...जवाहरलाल नेहरू राजगोपालाचारी और सरदार पटेल
बाएं से…जवाहरलाल नेहरू राजगोपालाचारी और सरदार पटेल

मौलाना अबुल कालाम आज़ाद यदि मुश्लिम लीग में होते तो देश के मुश्लिम लोगों को उनकी उदार द्रष्टि का फायदा मिलता साथ ही साथ मुस्लिम साम्प्रदायिकता वादी लोगों को इस्लाम का सच्चा मतलब वे समझा सकते थे और पूरा देश आज जो साम्प्रदायिकता की आग में झुलस रहा हैं इतने सारे लोग मर रहे हैं उस से भी बचा जा सकता था…

ऐसा कह कर सरदार थोड़ी देर के लिए मौन हुए फिर आगे उन्होंने कहा कि …
“कंराची में ही पकिस्तान की कब्र खोदी जा सकती थी, लेकिन आज मौलाना अबुल कालाम आज़ाद ने सब खेल बिगाड़ दिया और इतना ही नहीं पकिस्तान को और मजबूत बना दिया उन्होंने …..

बाएं से...महात्मा गांधी और सरदार पटेल
बाएं से…महात्मा गांधी और सरदार पटेल

मित्रों यह सच हैं और इतिहास के पन्नों पर लिखा जा चुका एक ऐसा सच हैं जिसे बदला नहीं जा सकता हैं, यहाँ पर इसे लिखने का पुनः केवल एक ही कारण हैं कि धर्म के नाम पर युद्ध बंद करो और मानव हित के बारे में थोडा विचार करों ….

सोर्स – सरदार वल्लभ भाई के ऊपर लिखी गयी किताब से …

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