जब मरीज के परिजनों ने किया डीएम को काल

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बलिया(ब्यूरो)- उत्तर प्रदेश की सत्ता तो सपा से भाजपा के हाथ चली गयी। हर विभाग के अधिकारी व कर्मचारी अपनी कार्यशैली बदलने लगे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को देखा जाय तो सत्ता बदलने से पूर्व ही सीएमओ बलिया पी. के.सिंह को शासन ने जहाँ निलम्बित कर दिया, वहीं वर्षों से एक स्थान पर जमे बाबुओं पर कार्यवाही की तलवार लटक रही है।
स्थानीय सीएचसी सीयर पर नजर डाली जाय, तो यह केन्द्र राजनीति का शिकार हो चुका है। यहाँ के अधिकांश कर्मचारियों की हाजिरी के हस्ताक्षर प्रति दिन दूसरे लोग लगाते है और वे महोदय केवल वेतन लेने बैंक में जाते हैं। चर्चा है कि जुबान बंद रखने के लिए इसके एवज में अधिकारियों को एक मुश्त बंधी हुई रकम पहुँच जाती है।

विगत 19 मार्च की रात करीब 8 बजे नजर डाले तो एक वाहन दुर्घटना में एक्सिडेंटल केश, एक महिला का बर्न केश, एक अज्ञात अचेत युवक व कुछ और मरीज आ गए। मौके पर केवल वार्ड ब्वाय छोड़कर कोई नहीं मिला। मजबूरन एक पीड़ित ने इसकी सूचना मोबाइल फोन पर सीधे डीएम बलिया तक को दे डाली। एमरजेंसी देख रहे लगभग 1 घंटे बाद अधीक्षक डा. जी.पी. चौधरी हाजिर हुए। यहाँ फार्मशिष्ट तक का अता-पता नहीं रहा। यहाँ तक की पुलिस के नाम अज्ञात मरीज का पी आई लेटर पुलिस के लिए अधीक्षक को अपने हाथों बनाना पड़ा।

सच्चाई तो यह है कि अधीक्षक का अस्पताल पर कोई नियन्त्रण नहीं है। इसका कारण अनेक है जो कड़ी निगरानी में पाया जा सकता है। चर्चा है यहाँ भी राजनैतिक दबाव में अवैध नियुक्तियां की गयी है।

रिपोर्ट- संतोष कुमार शर्मा
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