जब अधिकारियों संग जाम में फसे राज्यमंत्री, जाने तब क्या हुआ

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वाराणसी (ब्यूरो) धर्म नगरी काशी में अक्सर ही जाम की समस्या बनी रहती है। जब भी कोई अधिकारी आता है तो इस जटिल समस्या के निस्तारण का दावा करता है मगर सच्चाई कोसो दूर है। जनता जाम की झाम में फसकर बिलबिला उठती है कई बार तो जाम में एम्बुलेंस के फसने से मरीजों की मौत तक हो जाती है मगर पैदल चल रहे राज्यमंत्री जाम में फसें तो अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर बैठे।

शुक्रवार को सूबे के विधि, न्याय, खेल और युवा कल्याण मंत्री नीलकंठ तिवारी जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र और नवागत ज्येष्ठ पुलिस अधीक्षक आर.के. भरद्वाज सहित तमाम अधिकारियों संग सावन में अतिव्यस्ततम मार्ग मैदागिन से गोदौलिया तक पैदल भ्रमण कर रहे थे इसी दौरान वह चौक माला मंडी से बड़ादेव बांसफाटक तक लगे भीषण जाम में फस गये। जाम की हालत यह थी कि सड़क पर पैर रखने तक का भी जगह न था। जाम में जैसे ही मंत्री और जिला के आलाधिकारी फंसे थानेदार से लगायत पुलिसकर्मियों के पसीने छूटने लगे। आनन-फानन में सुरक्षाकर्मी लोगों को हटाते बढ़ाते रहे मगर वाराणसी में ध्वस्त यातायात व्यवस्था की पोल खुल गई।

मीडिया ने जब इस समस्या को लेकर राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी से प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैंने एसएसपी को इस समस्या को बताया है और निर्देश दिए है कि जाम के लिए थानेदार को जिम्मेदार बनाना होगा तब जाकर शहर को जाम से निजात मिल सकेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि थानेदारी थाने में बैठकर नही बल्कि क्षेत्रों में निकलकर करनी होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही शहर को जाम से मुक्ति मिलेगी।

रिपोर्ट – सर्वेश कुमार यादव

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