जब मुझ पर तेजाब फेका गया

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जब ये हुआ मै इलाहाबाद में अपनी दीदी  के घर पर थी, वो अभी – अभी अपने पति से अलग हुई थी और उससे तलाक लेने वाली थी, गर्मी का समय था, मै, दीदी और उसकी २ सहेलियां एक रेलवे स्टेशन के पास से गुजर रहे थे और उसी वक़्त मेरी बहन का पति और उसके 2 दोस्त तेजाब के साथ हमारा इंतजार कर रहे थे, उसने दीदी  का हाथ पकड़ा और उस पर तेजाब डालने की कोशिश की लेकिन दीदी ने  धक्का देकर उसको दूर धकेल दिया, दीदी ने मुझे आवाज़ देकर कहा ” रेशमा तू भाग ” लेकिन जब तक मै कुछ कर पाती उसके दोनों दोस्तों ने धक्का देकर मुझे नीचे गिरा दिया और मेरे दोनों हाथ पकडकर मेरे पूरे चेहरे पर तेजाब डाल  दिया मै बहुत  तेज़ से चीख पड़ी उस वक़्त मै सिर्फ 17 साल की थी, मेरे गुनहगार आज आज़ादी से घूम रहे जबकि मै एक बिन चेहरे का जीवन जी रही हूँ .

मै रेशमा इस घटना के बाद सरकार  की तरफ से भी कोई मदद नही मिली, लेकिन एक सामाजिक संस्था Make Love Not Scars ने मेरी मदद की और वही पर मै रिया जी से मिली, इस घटना के बाद मै दिन भर रोती  रहती थी मैंने ज़िन्दगी की उम्मीद ही छोड़ दी थी, मैं अपनी सारी हिम्मत खो चुकी थी, लेकिन उन्होंने मुझे संभाला और अब मै पढना चाहती हूँ  कुछ करना चाहती हूँ, मेरी जैसी पता नही कितनी और इस तरह की वह्सत का शिकार होती हैं मै उनके लिए उम्मीद बनना चाहती हूँ, मै उन्हें विश्वास दिलाना चाहती हूँ, जैसे की आज मै करती हूँ, सुन्दरता सिर्फ सुंदर दिखने से नही है वो तो आपके अंदर कहीं है, मै बहादुर हूँ और खुबसूरत भी

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