आखिर कहां गायब हो गये २६ नेपाली नागरिक

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गोरखपुर ब्यूरो : पुलिस की चाल मत पूछिए अभी तक उन २६ नेपाली नाहरिकों को नही ढूढ़ सकी है जिन्होने फर्जी पते और दस्तावेज से पासपोर्ट बनवा लिए थे तीन साल तक चली जांच के बाद जुलाई २०१५ मे कैंट थाने मे इनके खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज हुआ था मामला अभी तक ठंडे बस्ते मे है|

वर्ष २००५ से २००९ के बीच शहर के कूड़ाघाट,शाहपुर के पते पर ९१ नेपाली मूल के लोगो ने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था, जिसमे पुलिस,एआईयू के बेरीफिकेशन के बाद ६० लोगो को पासपोर्ट मिला था भारत-नेपाल मैत्री समाज के तत्कालीन अध्यक्ष रहे मोहन लाल गुप्ता ने २००९ मे आईजी को प्रार्थना-पत्र देकर नेपाली नागरिको के पासपोर्ट बनने की शिकायत की जांच मे मामला सही पाया गया|

बाद में शासन मे शिकायत के बाद बर्ष २०१४ मे नये सिरे से जांच हुई जिसमे कैंट क्षेत्र के पते पर २६ औरलशाहपुर के पते पर पासपोर्ट बनवाने वाले पांच लोग दोषी मिले थे १५ जुलाई २०१५ को कैंट पुलिस ने २६ नेपाली नागरिकों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने और १७ पासपोर्ट अधिनियम के तहत केस दर्ज किया आरोपियों मे २५ महिलाएं है|

इनके उपर दर्ज है मुकदमा
सीमा राना,कल्पना थापा,मेनका थापा,विमला थापा,रामा गुरूंग,सीमा,नरेश,कमला,प्रिया गुरूंग,सोनिया गुरूंग,आशा,आरती श्रेष्ठ,प्रिति गुरूंग,हेमा,संतोषी गुरूंग,कुमारी रमा गुरूंग,गंगा थापा,आशा थापा,कल्पना गुरूंग,माया,रीता सुब्बा,रूपा लामा,सिंधू,संगीता गुरूंग,सूरज राना,अनिल गुरूंग|

गोरखपुर के आईजी मोहित अग्रवाल का कहना है कि पासपोर्ट मामले मे जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी दो साल का मामला लंबित क्यो है पत्रावली तलब कर इसकी जानकारी करेगे|

रिपोर्ट-जयप्रकाश यादव

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