नेत्रहीन और दृष्टिबाधित जनों की चुनौतियों के प्रति लोगों को जागरूक करने का अभियान ‘व्हाइट केन डे’ 15 अक्टूबर से शुरू

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Image – Boldblindbeauty

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय 15 अक्टूबर, 2015 को व्हाइट केन डे का आयोजन कर रहा है, ताकि लोगों में जागरूकता पैदा की जा सके कि नेत्रहीन और दृष्टिबाधित जनों को किन चुनौतियों को सामना करना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि 8 अक्टूबर, 2015 को विश्व दृष्टि दिवस का सप्ताहभर का आयोजन शुरू हुआ था, जो कल समाप्त होगा। इस अवसर पर दिल्ली के विभिन्न स्थानों में आंखों की जांच की जाएगी और अभियान के बारे में लोगों को जानकारी दी जाएगी। 

      भारत में 16 मिलियन से अधिक नेत्रहीन और 18 मिलियन से अधिक दृष्टिबाधित व्यक्ति हैं। इन्हें प्रायः शिक्षा अवसर, रोजगार आदि प्राप्त करने में कठिनाई होती है।

      व्हाइट केन डे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्हाइट केन सेफ्टी डे के रूप में भी हर साल 15 अक्टूबर को मनाया जाता है। व्हाइट केन डे अभियान का उद्देश्य पूरे विश्व को इस बारे में परिचित कराना है कि नेत्रहीन और दृष्टिबाधित बिना किसी सहारे के अपना जीवन जीते हैं और काम करते हैं।

      अपने क्षेत्र में शानदार काम करने वाले कुछ नेत्रहीन और दृष्टिबाधित इस प्रकार हैं-

 

      रजनी गोपालकृष्णनः यह पहली दृष्टिबाधित महिला हैं जो चार्टर्ड अकाउंटेन्ट बनीं।

      कंचन पमनानीः यह वकील हैं और महाराष्ट्र की विभिन्न अदालतों में वकालत करती हैं।

      डॉ. गारीमेला सुब्रमण्यमः हिन्दू अखबार में वरिष्ठ पत्रकार।

      बेनो जेपहाइनः पहली दृष्टिबाधित आईएफएस महिला अधिकारी।

      हरि राघवनः कॉरपोरेट सेक्टर में वरिष्ठ प्रबंधक।

      चारू दत्ता जाधवः टाटा कंसलटेंसी सर्विसेस में वरिष्ठ सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल और शतरंज में इंटरनेशनल मास्टर।

      स्वर्गीय रवीन्द्र जैनः संगीतकार, गायक एवं गीतकार।

      प्रीति मोंगाः कामयाब मानव संसाधन उद्यमी।

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