वास्तव में इफ्तार पार्टी किसे देनी चाहिए ?

0
614
A group of children putting tilak to the President Dr. A. P. J. Abdul Kalam on the occasion of Raksha Bandhan in New Delhi on August 19, 2005.
रक्षा बंधन के अवसर पर छोटे-छोटे स्कूली बच्चों से तिलक लगवाते राष्ट्रपति डाक्टर कलाम (फोटो क्रेडिट-PIB)

वास्तव में इफ्तार पार्टी किसे देनी चाहिए ? किसे खिलाना चाहिए इस पवित्र दिन पर ? मेरे इन सभी सवालों के जवाब तब एक साथ मिल गए जब मैंने भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सचिव रहे श्री बी.एम. नायर ने अपनी किताब में श्री कलाम के द्वारा एक बार दी जाने वाली इफ्तार पार्टी का जिक्र किया I

घटना हैं वर्ष 2002 की जब भारत के महान वैज्ञानिक भारत रत्न डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मुखिया बन राष्ट्रपति भवन में देश के राष्ट्रपति के तौर पर निवास कर रहे थे I हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी रमजान का पावन महीना आ चुका था I देश के बड़े-बड़े नेता अभिनेता आजकल रमजान की बधाइयाँ बाँट रहे थे और जिधर भी देखो उधर चारो ओर इफ्तार पार्टियों का आयोजन किया जा रहा था I

ऐसे में राष्ट्रपति भवन की तरफ से इफ्तार पार्टी का आयोजन न किया जाय यह तो अभी तक भारत के इतिहास में कभी भी नहीं हुआ था और वह भी ऐसे समय में न हो जब कि देश के राष्ट्रपति भवन में स्वयं ही एक मुश्लिम राष्ट्रपति विराजमान हो I ऐसा होना तो पक्का ही था I बस इसी बात को लेकर राष्ट्रपति भवन के अधिकारीयों और कर्मचारियों ने संभावित होने वाली इफ्तार पार्टी की तैयारियां शुरू कर दी थी I

The President, Dr. A.P.J. Abdul Kalam being greeted by Sairang villagers in Mizoram on September 24, 2005.
अपने मिजोरम दौरे के दौरान मिजोरम के बच्चों से मिलते राष्ट्रपति डाक्टर कलाम (फोटो क्रेडिट-PIB)

अब इस बात का कैसे पता किया जाय की महामहिम राष्ट्रपति महोदय का इस इफ्तार पार्टी में कितने लोगों को बुलाने का और क्या कुछ अलग से भी करने का इरादा हैं क्या ? अतः यह सब कुछ जानने की जिम्मेदारी उनके सचिव बी.एम.नायर को दी गयी I नायर ने जब इस सम्बन्ध में डाक्टर कलाम से बात करने की कोशिश की तो पता चला कि वहां तो कुछ और ही चल रहा हैं और उसके बाद महामहिम डाक्टर कलाम ने नायर से जो कहा शायद वह नायर ने अभी तक किसी भी नेता के मुंह से नहीं सुना था I

डाक्टर कलाम ने अपने सचिव नायर से पूछा कि, “यह बताइए कि हम हर वर्ष इफ्तार का आयोजन क्यों करें ? वैसे भी जहाँ तक मेरा खयाल हैं यहाँ पर आने वाले सभी लोग काफी खाते पीते घरों से हैं I इनके लिए इफ्तार भोज के आयोजन का क्या फायदा I वैसे आप यह बताइए कि आप प्रतिवर्ष होने वाले इस भोज पर कितना खर्च कर देते हैं ?

अब इस बात की जानकारी सचिव महोदय के पास तो थी नहीं इसलिए तुरंत ही राष्ट्रपति भवन के उस विभाग को फोन लगाया गया जो इस तरह के आयोजनों का इंतजाम करता था I उन्होंने जानकारी दी कि एक बार के आयोजन में मोटे तौर पर तक़रीबन ढाई लाख रूपये का खर्च आ जाता हैं I

The President Dr. A.P.J Abdul Kalam participating in a cultural programme presented by locals at Campbell Bay (Andaman & Nicobar Islands) on May 7, 2005.
अंडमान निकोबार द्वीप समूह के लोगों के साथ एक संस्कृतिक कार्यक्रम में डांस करते हुए राष्ट्रपति डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (फोटो क्रेडिट-PIB)

जब इस बात डाक्टर कलाम साहब को बतायी गयी तो उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह पैसा हम इधर खर्च करने की बजाय अनाथालयों को क्यों नहीं दे सकते हैं ? और उन्होंने ने बिना रुके ही सीधे कहा कि नायर आप कुछ अनाथालयों का चुनाव करिए और यह सुनिश्चित करिए कि इस पैसे की बर्बादी न हो और इसे जिस काम के लिए प्रयोग किया जाना हैं वहीं इसका प्रयोग हो यानि की अनाथालय को ही मिले I

अब राष्ट्रपति भवन की तरफ से जिस धन को वहां होने वाली इफ्तार पार्टी में खर्च किया जाना था उसी संभावित धन से भोजन बनाने की सभी आवश्यक चीजें जैसे कि आटा, दालें, चावल, कम्बल और स्वेटर इत्यादि चीजों का इंतजाम किया गया और उसे अलग-अलग 28 अनाथालयों में रहने वाले बच्चों में बांट दिया गया I

A Group of Children  tying Rakhi to the President Dr. A. P. J. Abdul Kalam on the occasion of Raksha Bandhan in New Delhi on August 19, 2005.
रक्षा बंधन के अवसर पर बच्चों के एक समूह के द्वारा राष्ट्रपति भवन में राखी बंधवाते हुए राष्ट्रपति डाक्टर ए.पी.जे.अब्दुल कलाम (फोटो क्रेडिट-PIB)

नायर अपनी किताब में आगे लिखते हैं कि इतने में भी उन्हें संतोष नहीं मिला तो उन्होंने मुझसे कहा कि, “आपने यह जो धन खर्च किया हैं यह तो सरकारी खजाने से हैं, इसमें मेरा तो कोई योगदान हैं नहीं I इसलिए मैं आपको अपनी तरफ से 1 लाख रूपये का चेक देता हूँ I उसका भी आप इसी तरह से इस्तेमाल करिए जैसे आपने सरकारी धन का इस्तेमाल किया हैं I लेकिन आप इस बात का कभी किसी से भी इस बात का जिक्र मत करियेगा कि इसमें मैंने इतना पैसा खर्च किया हैं या फिर मैंने इस मामले में इतना पैसा दिया हैं I

और यह बात शायद कभी किसी को पता भी न चलती अगर बी.एम. नायर साहब अपनी किताब न लिखते I

आज इस घटना को पढने के बाद एक बात पता चल गयी कि वास्तव में कितना महान चरित्र था डाक्टर कलाम का इस बात का वर्णन शायद शब्दों में नहीं हो सकता I data input from book by B.M. Nayar

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

4 × 1 =