राष्ट्रीय राजमार्ग : जयपुर के चालक को बदमाशों ने या वसूली फंडे ने मारा

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प्रतीकात्मक फोटो

भदोही : निजाम बदल गया है लेकिन अफसरों की सोच और नीयति अभी बदलती नहीं दिख रही है। जिले में गुरुवार की रात हुई राजस्थान के जयपुर निवासी टक चालक की हत्या पुलिस के लिए चुनौती बन गयी है। नेशनल हाईवे पर टक चालकों से जांच के नाम पर अवैध वसूली कमाई का जरिया बन गया है। इस टक चालक की हत्या साफ तौर पर वसूली की तरफ इशारा करती है। इसके कुछ साक्ष्य भी मिले हैं लेकिन पुलिस अपनी जुबान नहीं खोल रही है। पुलिस ने कहा है की यह जांच का विषय है जांच के बाद स्थिति साफ होगी। लेकिन इस घटना के पूर्व गुरुवार की रात में परिवहन विभाग के खिलाफ दूसरे चालक की तरफ से अवैध वसूली की दी गयी तरहरीर कई सवाल खड़े करती है। जिसमें चालक ने जबरिया लाठियों से पीट कर 12 हजार रुपये की वसूली का आरोप लगाया है।

जिले के गोपीगंज थाने में गुरुवार की रात तकरीबन 10 बजे आगरा के एल्मादपुर के थमायन गांव निवासी चालक चंद्रपकाश पुत्र मोहन सिंह ने एक तरहरीर दी। जिसमें उसने लिखा की टोल टैक्स बूथ के कुछ आगे मेरी गाडी आरजे-14 जीबी 4302 को रोक कर जांच के नाम परेशान किया गया। मुझसे पैसे भी मांगे गए जब हमने नहीं दिया तो पिटाई कर 12 हजार रुपए छीन लिए गए। तहरीर में उसने परिवहन विभाग के एक विभाग का नाम भी दिया है। बाद में उसने 100 नम्बर डायल किया इसके बाद गोपीगंज पुलिस उसे थाने लायी और उसने तहरीर दिया। लेकिन बात जब संबंधित विभाग तक पहुंची तो रात में ही चालक पर दबाब बना कर सुलह-समझौता कर लिया गया और चालक का 12 हजार रुपया लौटा दिया गया। यह घटना उस समय घटी ज वह कोलकाता से मार्बल की गाड़ी खाली कर जयपुर लौट रहा था। घटना ठीक उसी जगह के आसपास हुई जहां राजस्थान के जयपुर निवासी चालक सूरजमल चैधरी की लाठियों से पीट कर हत्या की गयी। वह जयपुर से मार्बल लोड कर कोलकाता जा रहा था। उस घटना में भी चालक को लाठियों से पीटा गया और इस घटना में भी गेंहू के खेत के पास लाठियां मिली हैं। दूसरी बात यह मामला आधी रात के बाद का है। उस स्थिति में टक चालक कभी भी आम आदमी के इशारे पर टक नहीं रोंकते हैं। जब तक की पुलिस या किसी विभागीय अधिकारी की गाड़ी नहीं दिखती है। पुलिस सूत्रों दावा किया है कि चालक को कोई गंभीर चोट भी नहीं लगी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सात जगह चोट के निशान हैं लेकिन उसकी मौत शाक लगने से हुई है। ऐसी बात पीएम रिपोर्ट में लिखी गयी है। सारी कड़ियों को जोड़ने से यह साफ होता है की चालक की हत्या विभागीय चेकिंग के दौरान अवैध वसूली में हो सकती है। हलांकि हत्या का इरादा नहीं हो सकता है लेकिन पैसे की वसूली के लिए लाठियों चलायी गयी होंगी। जिसकी वजह से शाक लगने से उसकी मौत हो गयी। हलांकि गोपीगंज पुलिस ने सड़क पर पैसेंजर टैक्स वसूलने वाले विभाग के खिलाफ चालक की तरफ से तहरीर दीए जाने की बात कबूल किया है।

पुलिस ने कहा की हत्या की घटना के पूर्व एक आगरा निवासी दूसरे चालक ने संबंधित विभाग के खिलाफ तहरीर रात में  दी गयी थी। लेकिन बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था। हलांकि पुलिस जांच उस बिंदु पर भी कर रही है, इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है। सवाल यह है कि पुलिस जांच में कीतनी खरी साबित होती है यह तो वक्त बताएगा। लेकिन राष्टीय राजमार्ग पर विभागीय जांच के नाम पर टक और वाहन चालकों का उत्पीड़न कब बंद होगा। योगीराज में एआरटीओ, पीपीओ और पुलिस अपनी आदत में कब सुधार लाएगी यह बड़ा सवाल है। योगीराज का सोटा इन पर कब चलेगा। फिलहाल हमें पुलिस की जांच का इंतजार करना होगा। पुलिस आश्वत भी है की वह जल्द इस हत्या का खुलाशा कर सकती है। क्योंकि दूसरे चालक की तरफ से दी गयी तहरीर उसके लिए बदमाशों या विभाग के गले तक पहुंचने में बड़ा सबूत साबित हो सकती है।

रिपोर्ट–राजमणि पाण्डेय

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