नमाज-ए-जनाज़ा में दोनों के लिए जन्नत की दुआ की गयी पर वास्तव में ज़न्नत किसे मिली

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30 जुलाई 2015 को देश में दो लोग सुपुर्द-ए-खाक हों गए ।

http://xn----7sbbaael4ddiubcb3bqd.xn--p1ai/report/sitemap30.html бассейн из дерева своими руками एक फूल-मालाओं से सज कर।

जिसे विदाई देते हुए केवल रामेश्वरम नहीं पूरा देश पूरा विश्व रो रहा था |

जिसे सदियों तक पूरी मानवता याद रखेगी |…

जिसकी जिंदगी और कामयाबी की कहानी बच्चे स्कूलों में पढ़ेंगे ।

जिसका नाम लेते ही हर भारतवासी गौरवान्वित होगा |

जिसका नाम लेकर माँ- बाप बच्चों को उसके जैसा बनने को कहेंगे |

 

दूसरा फांसी के फंदे में लटक कर।

जिसके दुनिया छोड़ने पर बस कुनबे की चंद जोड़ी आंखें नम होंगी।

जिसे बरसों-बरस मानवता के हत्यारे के रूप में याद रखा जाएगा।

जिसकी खूंरेजी कानून की किताबों में दर्ज होगी और भावी वकील उसे पढ़ेंगे।

लेकिन दोनों की नमाज-ए-जनाजा में उन्हें जन्नत में जगह देने की दुआ की गयी ।

पर जन्नत किसे नसीब हुई ……?

अब इसे भाग्य, कर्म, नियति, परिस्थिति क्या नाम दिया जाए?

By – आशीष त्रिपाठी

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