अवैध कब्जा अभियान के तहत जागा वन विभाग, पूरा का पूरा गाँव ही वन विभाग की जमीन पर बसा मिला

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बांगरमऊ/उन्नाव (ब्यूरो) तहसील क्षेत्र बांगरमऊ की गंगा कटरी में स्थित ग्राम रुस्तमपुर को अपना अस्तित्व बचाने के लिए लाले पड़े हैं।प्रदेश में सरकारी जमीनों से हटाए जा रहे अवैध कब्जों के अभियान के तहत वन विभाग को भी ग्राम रुस्तम पुर में स्थित अपनी जमीन की याद आ गई है और बिभाग गांव की जमीन को अपनी बताकर वहां बनाए गए मकानों को गिराने का काम शुरू कर चुका है। ऐसी स्थिति में गांव के लोग काफी भयभीत हैं और गांव के अस्तित्व को बचाने के लिए क्षेत्रीय विधायक से लेकर प्रधानमंत्री तक को पत्र भेजकर अपने को बेघर होने से बचाने की अपील की है ।गांव वालों का कहना है की जमीदारी के दौरान एक लेखपाल द्वारा की गई खुराफात के चलते उन लोगों के सामने आज यह समस्या आ खड़ी हुई है ।

बांगरमऊ तहसील क्षेत्र की गंगा कटरी में स्थित राजस्व ग्राम रुस्तमपुर जो कि एक स्वतंत्र गांव सभा भी है उसका इतिहास लगभग 200 वर्ष पुराना है। बताते हैं कि उक्त गांव के बुजुर्गों तक को यह जानकारी नहीं है कि उनका यह गांव वन विभाग की भूमि में बसा हुआ है ।और न अब तक वन विभाग के ही किसी अधिकारी कर्मचारी ने इस गांव वालों से उक्त भूमि के बारे में अपने विभाग की भूमि होने का दावा पेश किया था।उक्त गावँ में कच्चे और पक्के मकानों को मिलाकर लगभग 137 घर बने होंगे। और इस गांव को वर्ष 2007-08 में अंबेडकर गांव के रूप में चयनित कर इसका विकास भी कराया जा चुका है। गांव में परिषद द्वारा संचालित एक प्राथमिक विद्यालय भी है। और गांव तक पक्का संपर्क मार्ग भी बना है। गांव की गलियों में आर सी सी मार्ग भी बने हैं ।गांव में इंदिरा आवास, लोहिया आवास और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी कई लोगों को लाभ देकर उनके मकान बनवाए गए हैं ।इसके अलावा गांव को खुले में शौच जाने से मुक्त करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर शौचालयों का भी निर्माण कराया गया है ।

गांव निवासी बसंत कुमार दीक्षित, अनिल कुमार दीक्षित, अर्जुन लाल, अवधेश कुमार ,बाबूलाल व् दिवाकर आदि ने बताया कि वर्ष 1998 व वर्ष 2003 में गांव के पास स्थित वन विभाग की भूमि गंगा कटान में चली गई थी। उसके बाद वन विभाग के लोगों ने गांव के लोगों को धमका कर कई लोगों से जुर्माना वसूल कर लाखों रुपयों की अवैध कमाई की थी ।गंगा में कटान होने के बाद न यहां कोई सर्वे किया गया और न वन विभाग नें ही कोई नापजोख की ।केवल खाना पूर्ति की जाती रही है राजस्व गांव व ग्राम पंचायत होने के बाद भी यदि यह गांव वन विभाग की जमीन में बसा है तो यह गलती राजस्व कर्मचारियों की है। जिन्होंने आज तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

ग्राम पंचायत के बुजुर्ग महेश शंकर, बेवा सुषमा, होरीलाल, पूर्व प्रधान रामस्वरूप, साहब लाल आदि बताते हैं कि उनके बुजुर्ग कहा करते थे की वर्ष 1952 में जब जमीदारी प्रथा लागू थी तब एक मन्ना नगर गांव के मुन्नालाल लेखपाल थे उन्होंने विरोध बस उक्त गांव की जमीन सहित गांव के आसपास की जमीन को मिलाकर लगभग 336 बीघा भूमि को वन विभाग में दर्ज करा दिया था ।गांव में रिजर्व फारेस्ट के नाम से दर्ज भूमि जिसमें घाटा संख्या भी नहीं है उसमें गांव का हीरालाल तालाब वर्ष 2007-0 8 में गांव सभा द्वारा बनवाया गया था। तब भी वन विभाग ने इस पर कोई अपनी आपत्ति नहीं दर्ज कराई थी और बिभाग को अपनी जमीन की अब याद आ गई जब प्रदेश सरकार ने सरकारी जमीनों पर से अवैध कब्जे हटवाने का आदेश दिया है। गांव निवासी कामता, मुकेश, राधेलाल, फूलचंद व राजेश्वर कहते हैं इस गांव के लोगों की कृषि भूमि जिनके रकबा कई किसानों के आपस में मिले हैं और उनकी वह भूमिधरी जमीन घोषित है उसको भी बन विभाग अपनी बता रहा है। इन किसानों का कहना था जब हम अपनी भूमिधरी जमीन नापने की बात करते हैं तो कहा जाता है हद बरारी का वाद दायर करो और वन विभाग ऐसे ही बिना हद बरारी व बिना नापे ही उक्त भूमि पर अपना दावा ठोक रहा है और वन विभाग के इस दावे पर राजस्व विभाग के लोग भी मौन साधे हुए हैं ।

गांव निवासी सुनील, श्याम, सत्येंद्र कुमारम, राम रतन, सुरेंद्र आदि ने क्षेत्रीय विधायक कुलदीप सिंह सिंगर सहित मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के अलावा जिलाधिकारी और जनपद के अन्य अधिकारियों को लिखित प्रत्यावेदन देते हुए बताया है कि अभी हाल ही में उनके गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों का चयन उन्हें जब आवास दिए गए और लाभार्थी अपने आवास बनाने लगे तो अचानक वन विभाग के अधिकारियों ने आकर उक्त भूमि पर अपना दावा ठोक कर राधेलाल रैदास सहित जिन हरिजनों को आवास योजना से लाभांवित किया गया था उनके आवासों को गिरा दिया ।और वन विभाग के लोग यह धमकी दे गए हैं की यह भूमि उनकी है और पूरे गांव के आवासों को गिराकर भूमि खाली कराई जाएगी ।गांव वालों में इस बात का रोष है कि जिनके मकान गिराये गए उनको पहले नोटिस दी जानी चाहिए थी ।अचानक एकाएक उनके मकान गिरा कर उन्हें बेघर नहीं किया जाना चाहिए था। गांव वासियों ने अपने भेजे गए प्रत्यावेदन में यह भी अवगत कराया है कि उक्त गांव लोग बाढ़ व सूखा से पिछले कई वर्षों से परेशान रहे और अब वन विभाग परेशान कर रहा है। गांव के लोगों में खलबली मची है और उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर अपने को बेघर होने से बचाने की अपील केंद्र व प्रदेश की सरकार और अधिकारियों से की है। इस मामले में जब वन रेंज अधिकारी बांगरमऊ रमेशचंद्र भट्ट से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके द्वारा सर्वे का कार्य कराया जा रहा है। और उनके वन विभाग की जमीन में जो मकान मिलेंगे उन्हें धराशाई किया जाएगा।उन्होंने कहा कि उनका गांव उजाड़ने का कोई इरादा नहीं है वह तो सिर्फ अपनी जमीन को खाली कराना चाहते हैं।

रिपोर्ट – रघुनाथ प्रसाद

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