आखिर जमदग्नि जैसे महाज्ञानी ऋषि ने अपनी ही पत्नी का सर क्यों कटवा दिया

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हिन्दू धर्म में ऐसा प्रचलित हैं कि परसुराम जिन्हें भगवान् विष्णु का अवतार भी कहा जाता हैं उन्होंने अपने पिता के कहने महर्षि जमदग्नि के कहने पर अपनी माता रेणुका का वध कर दिया था जिसके कारण उनके सर माता की हत्या का, माता के वध का पाप भी लग गया था I आपको बता दें कि आखिर महर्षि परसुराम को ऐसा क्यों करना पड़ा I

इसके पीछे एक कथा हैं कि एक बार महर्षि जमदग्नि को यज्ञ करना था और उन्होंने माता रेणुका को गंगा जी से जल लाने के लिए कहा जिससे यज्ञ का आरम्भ किया जा सके I महर्षि का आदेश पा कर देवी रेणुका जल लाने के लिए गंगा के तट पर पहुंची तो उन्होंने देखा कि गन्धर्वों का राजा चित्ररथ कई अप्रसराओं के साथ जल में विहार कर रहा है I उसे इस तरह से अप्सराओं के साथ जल क्रीडा करते हुए देख रेणुका भी आसक्त हो गयी और वह वही पर रुक गयी I उनके दिमाग से ऋषि को गंगा जल देना निकल गया और वह वही पर खड़ी रह गयी I

देवी रेणुका के जल न लाने की वजह से या फिर कहें कि जल लाने में विलंब होने की वजह से ऋषि जमदग्नि का यज्ञ नहीं हो पाया क्योंकि यज्ञ का समय व्यतीत हो चुका था I क्रोधित महर्षि ने जब ध्यान देकर अपनी दिव्यद्रष्टि से रेणुका के देर से आने का कारण जाना तो वह बहुत ही अधिक क्रोधित हुए और उन्होंने अपनी पत्नी को इस तरह से आर्य मर्यादा विरोधी आचरण करने पर, किसी पुरुष को देखकर उस पर आसक्त होने की वजह से ऋषि ने अपने पुत्रों को आदेश दिया कि वह अपनी माता रेणुका का सर काट डालें I

पुत्रों ने जब अपने पिता का यह आदेश सुना तो माता के प्रेम के वश में उन्होंने ऐसा करने में असमर्थता जताई जिस पर क्रोधित होकर महर्षि जमदग्नि ने उन्हें श्राप दे दिया और कहा कि आज से अभी से तुम सभी अपनी विचार करने, सोचने-समझने की जो शक्ति ज्ञान मैंने दिया हैं वह सब नष्ट हो जाएगा I लेकिन जब महर्षि ने अपने सबसे श्रेष्ठ पुत्र परसुराम को अपनी माता का सर काटने का आदेश दिया तो उन्होंने सहर्ष ही अपने फरसे से अपनी माता का सर काट दिया I और तुरंत ही उनकी माता का शरीर दो टुकड़ों में विभक्त हो गया I

पुत्र के द्वारा इस तरह से आज्ञा पालन को देखकर महर्षि जमदग्नि बहुत ही अधिक प्रशन्न हुए और उन्होंने महर्षि परसुराम से वर मांगने को कहा I तभी परसुराम ने अपने पिता से तीन वरदान मांगे !

माँ पुनर्जीवित हो जायँ,
उन्हें मरने की स्मृति न रहे,
भाई चेतना-युक्त हो जायँ और

जमदग्नि ने उन्हें तीनो वरदान दे दिये। माता तो पुनः जीवित हो गई पर परशुराम पर मातृहत्या का पाप चढ़ गया।

राजस्थान के चितौड़ जिले में स्तिथ मातृकुण्डिया वह जगह है जहाँ  परशुराम अपनी माँ की हत्या (वध) के पाप से मुक्त हुए थे। यहां पर उन्होंने शिव जी की तपस्या की थी और फिर शिवजी के कहे अनुसार मातृकुण्डिया के जल में स्नान करने से उनका पाप धूल गया था। इस जगह को मेवाड़ का हरिद्वार  भी कहा जाता है। यह स्थान महर्षि जमदगनी की तपोभूमि से लगभग 80 किलो मीटर दूर हैं।

मातृकुण्डिया से कुछ मील की दुरी पर ही परशुराम महदेव मंदिर स्तिथ है इसका निर्माण स्वंय परशुराम ने पहाड़ी को अपने फरसे से काट कर किया था। इसे मेवाड़ का अमरनाथ कहते है। इसके बारे में समूर्ण जानकारी आप यहाँ पढ़ सकते है

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