क्यों समस्यायों के बजाय धर्म के आधार पर वोट देते हैं लोग

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उन्नाव(ब्यूरो)– बीघापुर क्षेत्र की जनता जहां चंद दिनों पहले बिजली,पानी,सड़क आदि मूलभूत समस्याओं कें लिए कोहराम मचाए थी, वहीं जितने दिन चुनाव प्रक्रिया चली,जनता षान्त रही। मतदान हो जाने के बाद क्षेत्र की वही समस्याएं लोगों की जबान पर कुलबुलाने लगी हैं। लगभग हर विधान सभा चुनाव क्षेत्रीय मुद्दों पर ही लड़े जाते रहे हैं।क्षेत्र के किसी नेता ने क्षेत्रीय मुद्दे नहीं उठाए न ही जनता ने पूछा कि क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं के लिए काम करोगे या नहीं।आखिर ऐसा क्या हो जाता है कि जो जनता पांच साल विकास के लिए चिल्लाती रहती है और चुनाव आते ही विकास के मुद्दे पीछे तथा जाति व धर्म के आधार पर प्रत्याषियों का चयन पार्टियां भी करती हैं और जनता भी इसी आधार पर उनका मूल्यांकन करती है। चर्चाओं पर विष्वास करें तो इस बार भी क्षेत्र की जनता ने जाति और धर्म के आधार पर ही मतदान किया है, जबकि लम्बे समय क्षेत्रीय जनता टूटी सड़क और सूखी नहर को लेकर सत्तापक्ष को लगातार घेरती रही है। दो वर्श से अधिक का समय गुजर गया उन्नाव लालगंज राजमार्ग पर उड़ती घूल और बड़े बड़े गड्ढे भरने के बड़े बड़े जुमले चुनावी बयार मेें बह गए।

क्षेत्र की नहरें अब भी सूखी ही हैं। बिजली चुनावी त्योहार में तो आई लेकिन चुनावी त्योहार गुजरते ही अपने पुराने ढर्रे पर लौट चुकी है कि आना कम और गायब रहना ज्यादा। क्षेत्र में बढ़ते आवारा छुट्टा जानवरों की समस्या न तो पार्टियों का चुनावी मुद्दा बनी और न ही वह किसान ही इसे चुनावी चैपालों तक पहुंचा पाए जो इनसे पीड़ित हैं ,जबकि चुनाव के पहले वही किसान छृट्टा जानवारों को लेकर सरकार को कोसता रहा है। आखिर ऐसा क्या हो जाता है जब जनता अपने मुद्दों से चुनाव के समय ही भटक जाती है।अब इसमें दोश किसका है? जनता का या नेता का? फिलहाल जनता ने जो निर्णय लिया होगा वह सही ही होगा |

रिपोर्ट – मनोज सिंह

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