हम आने वाली पीढ़ियों को बड़े गर्व के साथ यह कह सकते हैं कि हमनें इन महावीरों को अपनी आँखों से देखा हैं …..उनमें से कुछ –

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हिंदुस्तान के कुछ ऐसे वीर जो आज भी जब राजपथ पर गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर निकलते हैं तो हर किसी का सर गर्व से उनके साम्मान में झुक जाता हैं –

हम आने वाली पीढ़ियों को बड़े गर्व के साथ यह कह सकते हैं कि हमनें इन महावीरों को अपनी आँखों से देखा हैं …..उनमें से कुछ –

परम वीर चक्र विजेता –

कैप्टन बाना सिंह (परम वीर चक्र विजेता)

नायब सूबेदार( बाद में ऑनरेरी कैप्टन) बाना सिंग( 8 जेएंड के लाइट एंड इनफैन्ट्री) ने 1987 में विश्व के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर में 21153 फीट की ऊंचाई पर स्थित शत्रु के कैद नामक पोस्ट को नष्ट किया। इस पोस्ट तक पहुँचना बेहद कठिन था क्योंकि यह दोनों ओर से बर्फ की 1500 फीट की दीवार से घिरा था। बेहद बर्फबारी के बीच और शत्रु के प्रतिरोध का सामना करते हुए नायब सूबेदार बाना सिंह ने असीम साहस का परिचय देते हुए शत्रु के पोस्ट को नष्ट किया। नायब सूबेदार द्वारा विपरीत परिस्थितियों में दिखाई गई शानदार वीरता के चलते उन्हें भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

कैप्टन बाना सिंह
कैप्टन बाना सिंह

उल्लेखनीय है कि शत्रु ने 1987 में सियाचिन में रणनीतिक महत्व की साल्टोरो रिज पर  घुसपैठ कर कैद नामक पोस्ट बना ली थी। इससे अमर एवं सोनम नामक भारतीय पोस्ट तक रसद की आपूर्ति पर संकट के बादल मंडराने लगे थे और रणनीतिक लिहाज से भी सुरक्षा खतरे में थी। सेना की कमांड ने इस पोस्ट को नष्ट करने ऑपरेशन चलाने का निर्णय लिया। सबसे पहले पेट्रोल लीडर लेफ्टिनेंट राजीव पांडे के नेतृत्व में एक टुकड़ी भेजी गई लेकिन उन्हें पाकिस्तानी कमांडो ने देख लिया और ले.पांडे सहित 10 जवान शहीद हो गए। बाद में ले. राजीव पांडे की स्मृति में इस ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन राजीव रखा गया।
इसके बाद भेजे गए नायब सूबेदार बाना सिंह ने कठिन परिस्थितियों में चढ़ाई पूरी की, शत्रु का ध्यान बंटाने के लिए भारतीय सेना नीचे से फायरिंग करती रही। अंत में बर्फ की कठिन दीवार चढ़कर नायब सूबेदार बाना सिंह ऊपर पहुँचे और शत्रु के बंकर को नष्ट किया।

 

 

 

नायब सूबेदार संजय कुमार (परम वीर चक्र विजेता) –

नायब सूबेदार संजय कुमार
नायब सूबेदार संजय कुमार

संजय 13 जैक राइफल्स के हैं जिसके रणबांकुरों ने कारगिल में दुश्मन पर कहर बरपाया था। रेजिमेंट ने कारगिल युद्ध में प्वाइंट 4750, 4875 और 5140 को फतेह किया। यह पहली रेजिमेंट है जिसके दो परमवीर चक्र का सम्मान मिला। संजय के अलावा कैप्टन विक्रम बतरा को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया। इसके अलावा रेजिमेंट इस युद्ध में सात वीर चक्र मिले। वीरता की इस मिसल के लिए रेजिमेंट को ब्रेवेस्ट आफ द ब्रेव का टाइटल नवाजा गया है।

सूबेदार योगेन्द्र सिंह यादव (परम वीर चक्र विजेता)

 

सूबेदार योगेन्द्र सिंह यादव
सूबेदार योगेन्द्र सिंह यादव

टाइगर हिल टॉप विजेता के नाम से मशहूर इस भारतीय वीर ने अकेले ही कारगिल के युद्ध में पाकिस्तानियों के छक्के छुडाते हुए कारगिल की सबसे ऊँची चोटी टाइगर हिल टॉप को दुश्मनों से छुड़ा लिया था I और उस पर भारत का गौरवशाली तिरंगा फहरा दिया था I जिसके कारण ही भारत के इस महावीर को भारत सरकार के द्वारा परम वीर चक्र से नवाज़ा गया था I

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