कम बोल्टेज व बिजली कटौती से आम जनमानस पस्त

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प्रतीकात्मक फोटो

रायबरेली (ब्यूरो)- योगी सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद शहर से लेकर गाँव तक बिजली व्यवस्था बद से बदतर है। ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली देने के निर्देश जहाँ एक बेकार साबित हुआ वही अब जनता के सब्र की सीमा भी पार हो चुकी है| जिससे लोग नेताओ के सहारे डीएम को ज्ञापन भी सौप रहे है लेकिन उसका असर भी बेकार ही साबित हो रहा, प्रशासन की एक ओर चुप्पी तो जनता भी अब दबी जुबान से सरकार बुरा भला कहने लगी है।

मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि शहर के लोग अब त्राहि-त्राहि करने लगे है। सबसे बड़ी बात कि जो थोड़ी बहुत बिजली की सप्लाई मिलती भी है उसमें भी लो वोल्टेज से लोग परेशान हैं तो कही हाई वोल्टेज से, उसके साथ ही बार-बार त्रिपिग के साथ जबदस्त बिजली कटौती ने तो ग्रामीण और शहरों के लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति के ऐलान के बाद लोगों को आस जगी थी कि अब बिजली कटौती और दूसरी समस्याओं से निजात मिल जाएगी लेकिन लोगो की आस धरी की धरी रह गयी। बिजली विभाग के अधिकारी व लाइनमैन सीधे मुँह से बात नहीं कर रहे है यहाँ तक की सीयूजी नं. भी बंद कर दिया जाता है। जिले का शहर क्षेत्र त्रहिमान है, वही ग्रामीण क्षेत्रों में लोग गालियां तक दे रहे है। लोगो का कहना है कि ऐसा ही हाल रहा तो आने वाले दिनों में रोड पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। जिले के खीरों कस्बे में बिजली सप्लाई का हाल बेहद खराब है। दो घंटे मिलने वाली बिजली में लो वोल्टेज के चलते लोग आक्रोशित दिखाई दे रहे है। वही जिले में भी लो वोल्टेज के कारण जनता गुस्से में है| खास कर कि आचार्य दिवेद्वी नगर में सबसे कम वोल्टेज आता है, जिससे लोगो को खास ही परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

सूत्रों की माने तो जनता का गुस्सा कभी उबाल मार सकता है क्योंकि 23 प्राइवेट लाइन मैन होने के बावजूद भी लोगो की समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है|

बिना सुविधा शुल्क के कोई लाइन मैन हिलता नहीं है इधर जेई साहब रिपोर्ट तैयार करने में जुटे है कि कौन कितनी बिजली जलाता है जब बिजली ही नहीं मिली तो कितनी बिजली और काहे का बिल। तारो की दशा नाजुक है ज्यादा बिजली दे नहीं सकते, दिया तो हफ्तों के लिए फाल्ट ढूढते लग जाता है। दबी जुबान जेई का कहना है व्यवस्था ऊपर से खराब है हम ही क्या करें। लोड ज्यादा है किसान ट्यूबेल चला रहा है, जब बिजली ही नहीं तो ट्यूबवेल क्या चलेंगे, यह किसान कह रहा है। लोगो के अनुसार जिस तरह से सरकार बनी है अगर ऐसी ही शासन, प्रशासन, पुलिस के साथ अन्य समस्याये रही तो निश्चित की सरकार को इसका खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा। यही हाल अन्य ग्रमीण क्षेत्र में भी हैं जिसमे सलोन, लालगंज, डलमऊ, खीरो आदि ग्रामीण इलाकों में जहाँ भीषण गर्मी के बाद कस्बे से लेकर गांव तक बिजली को लेकर हाहाकार मचा हुआ है।

कस्बे में दिन व रात मिलाकर 16 से 18 घंटे व ग्रामीण इलाकों में 20 घंटे बिजली काटी जा रही है। बुधवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सलोन में बिजली, कटौती को लेकर हायतौबा की स्थिति रही। बिजली न होने के चलते वार्डों में लगे पंखे चले नहीं। मरीज और तीमारदार भीषण गर्मी में परेशान रहे। दूरदराज से उपचार कराने के लिए आए मरीज व चिकित्सक भी पसीने से तर-बतर रहे। हाथ का पंखा ही सहारा रहा। सरकार द्वारा तहसील को बीस वा ग्रामीण क्षेत्र को 18 घंटे बिजली देने के दावों को लेकर लोगों में उबाल है।

रिपोर्ट- अनुज मौर्य/प्रदीप गुप्ता 

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