ओलंपिक में इतिहास रचने वाली टीम के खिलाड़ी ट्रेन की फर्श पर बैठकर सफ़र करने को मजबूर…

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women hockey
हाल ही में हुए रियो ओलंपिक में भारत जैसे बड़े देश का दो पदक ही जीत पाना चर्चा का विषय बना रहा और कई लोगों ने तो खिलाडियों पर भी ऊँगली उठाई, पर रियो से लौटकर आने के बाद जीत कर आये खिलाड़ियों का भव्यता से स्वागत भी हुआ पर वहीँ दूसरी ओर रियो से लौटकर आये कुछ खिलाड़ियों के साथ देश में ही ऐसा व्यवहार हुआ कि हमारे खिलाड़ियों के लचर प्रदर्शन के पीछे की सबसे बड़ी वजह सामने आ गयी |

रियो में इतिहास रचकर भारत लौटी महिला हॉकी की टीम जब भारत लौटने के बाद अपने घरों को रवाना हुई तो टीम के कुछ सदस्यों का टिकट कन्फर्म नहीं था और ऐसे में इन खिलाड़ियों को ट्रेन की फर्श पर बैठकर यात्रा करनी पड़ी, ये खिलाड़ी रांची से राउरकेला के लिए जा रही थीं |

स्टेशन पर पहुँचने पर जब टीम की खिलाडियों ने ट्रेन के टीटीई को बताया कि उनकी सीटें कन्फर्म नहीं हैं तो उसने कहा कि वे ट्रेन की फर्श पर सफर करें क्योंकि जब तक कोई सीट खाली नहीं होती उन्हें सीट नहीं मिल सकती |

खिलाड़ियों ने अपनी पहचान बताते हुए अनुरोध किया कि हम पिछले तीन-चार दिनों से सफर कर रहे हैं और कृपया हमारे लिए एक-दो सीटें देदें, इसपर टीटीई ने कहा कि कोई सीट खाली नहीं है और या तो दूसरी ट्रेन का इंतजार करो या फिर ट्रेन के गेट की फर्श पर बैठो |

ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश को सम्मानित कराने वाले ये खिलाड़ी अपने ही देश में हीन भावना का शिकार हो रहे हैं, देश के खेल मंत्रालय से लेकर रेलवे तक इस मामले में जिम्मेदार हैं, और टीटीई भी अगर चाहता तो खिलाड़ियों को सीट मुहैया करवा सकता था यह बात सर्वविदित है |

पनपोश जिले के एसडीएम ने इस घटना पर नाराजगी जताते हए रेलवे के खिलाफ कार्रवाई करने की बात की है | इस मामले में खेल मंत्रालय और राष्ट्रीय खेल संघ के खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए |

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