प्रेमी को पति बताकर गुजारा मांगने वाली महिला की अर्जी खारिज

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सुल्तानपुर (ब्यूरो)- प्रेमी को पति बताकर गुजारे का दावा करने वाली महिला को फैमिली कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। प्रधान न्यायाधीश आनंद प्रकाश ने महिला के जरिए प्रेमी को पति न साबित कर पाने के चलते उसकी अर्जी को खारिज कर दिया। मामला कूरेभार थाना क्षेत्र के माधौ का पुरवा पाली गांव से जुड़ा है। जहां के रहने वाले जवाहर को अपना पति बताते हुए कमला देवी निवासिनी असेरवा बीकापुर -फैजाबाद ने गुजारे का दावा ठोका था।

जिस पर हाजिर हुए जवाहर ने अपने अधिवक्ता अरुण पांडेय के माध्यम से अदालत को बताया कि कमला की शादी उसके पिता ने भगवंते कोरी के साथ की थी। जिसके साथ अक्सर वह रहती थी आैर उनके बच्चे भी हैं,लेकिन बाद में वह अपने प्रेमी जवाहर के साथ भागकर पाली गांव में रहने लगी। इसी आधार पर वह जवाहर से अनबन हो जाने पर उसे अपना पति बताते हुए भरण-पोषण की मांग करने लगी। जिस पर जवाहर के अधिवक्ता ने आपत्ति जताते हुए अर्जी को निराधार बताते हुए खारिज करने की मांग की। उभय पक्षों को सुनने के पश्चात अदालत ने कमला देवी के जरिए जवाहर को अपना पति न साबित कर पाने के चलते उसकी याचिका को खारिज कर दिया है।

जिपं अध्यक्ष पति के मुकदमें में गवाह ने पलटा बयान
सुलतानपुर – जिला पंचायत अध्यक्ष पति के खिलाफ चल रहे जानलेवा हमले के मामले में गवाह जिरह में टूट गया। जिससे अभियोजन पक्ष के सबूत कमजोर होते नजर आ रहे हैं। मामला हलियापुर थाना क्षेत्र के रामपुर बबुआन से जुड़ा है। जहां के रहने वाले वेद प्रताप सिंह ने मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि  शिवकुमार सिंह समेत अन्य के खिलाफ जानलेवा हमले समेत अन्य आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है। इसी मामले में बुधवार को गवाह अजीत प्रताप सिंह साक्ष्य के लिए पेश हुआ ,जो बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद सिंह राजा की जिरह में अपने कथन को साबित ही नहीं कर सका आैर घटना को रात के अंधेरे में बताते हुए देखने से इंकार कर दिया। अजीत की इस गवाही से अभियोजन पक्ष कमजोर होता नजर आ रहा है। जिसे आरोपी अपने पक्ष में मान रहे हैं।

हाजी मुन्ने हत्याकांड के गवाह को मिली धमकी,सुरक्षा का आदेश
सुलतानपुर – बहुचर्चित हाजी मुन्ने हत्याकांड में कोर्ट की सख्ती पर बुधवार को हिस्ट्रीशीटर रीशू सिंह उर्फ देवांश अदालत में पेश किया गया। फिलहाल सरकारी वकील की कमियों के चलते गवाह का बयान नहीं हो सका।वहीं गवाह को आरोपियों के जरिए धमकी मिलने की भी खबर है। जिस पर एडीजे सप्तम अनिल कुमार यादव ने अगली पेशी पर गवाह को पुलिस सुरक्षा के बीच पेश करने का आदेश दिया है। मालूम हो कि वर्ष 2015 में हुई हाजी मुन्ने की हत्या के मामले का विचारण एडीजे सप्तम की अदालत में चल रहा है। जिसमें अभी तक एक गवाह का ही साक्ष्य पूरा हो सका है। दूसरा गवाह फैय्याज कई महीनों से गवाही देने आ रहा है,लेकिन आरोपियों की दांव-पेंच व पुलिसिया कार्यशैली की वजह से उसकी गवाही अधर में लटकी है।

जबकि मुकदमे को शीघ्र निपटाने के लिए हाईकोर्ट का निर्देश भी है। पिछली पेशी पर जेल अधीक्षक आजमगढ़ की लापरवाही से रीशू सिंह अदालत में नहीं पेश किया जा सका था। जिस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए जेल अधीक्षक को तलब करने का आदेश जारी किया था। जिससे हरकत में आये जेल अधीक्षक ने बुधवार को रीशू सिंह को अदालत में पेश ही करा दिया। फिलहाल सरकारी वकीलों पर कई अदालतों की जिम्मेदारी होने के चलते गवाह फैय्याज का साक्ष्य नहीं हो सका। अदालत ने साक्ष्य के लिए आगामी 24 सितम्बर की तिथि तय की है आैर साथ ही अभियोजन की शिकायत पर गवाह को कड़ी सुरक्षा के बीच पेश करने का आदेश दिया है।

रिपोर्ट- अंकुश यादव 

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