सफलता की नई ऊँचाईयां छूते योगेश्वर दत्त ओलंपिक में भारत के स्वर्ण की सबसे बड़ी उम्मीद…

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yogeshwar dutt

रियो ओलंपिक्स में 21 तारीख़ को होने वाले Wrestling मुकाबले में सभी भारतीय समर्थकों की निगाहें योगेश्वर दत्त पर होंगी, लगातार चौथी बार ओलिंपिक में हिस्सा लेने जा रहे योगेश्वेर दत्त से पूरे भारत को बहुत उमीदें हैं, पिछले ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद अब उनकी निगाहें गोल्ड मेडल की तरफ होगी, आइये एक नज़र डालते हैं इनकी पूर्व उपलब्धियों व संघर्षों पर

2 नवम्बर 1982, हरियाणा की धरती में भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त का जन्म हुआ ! दत्त ने महज़ 8 साल की उम्र में ही पहलवानी शुरू कर दी थी उनकी प्रेरणा के स्त्रोत उन्हीं के गाँव के नामी पहलवान बलराज पहलवान थे | 2003 में नाइजीरिया में हुए कामनवेल्थ गेम्स में दत्त ने गोल्ड मेडल हासिल किया, 2004 में पहली बार उन्होंने ओलंपिक (Men’s freestyle 55 kg) में हिस्सा लिया व 18वें स्थान पर रहे, 2006 में दोहा में होने वाले एशियन गेम्स में हिस्सा लेने से 9 दिन पहले ही उनके पिता की मृत्यु हो गयी वे उस समय घुटने की चोट से भी गुज़र रहे थे लेकिन इन सब मानसिक और शारीरिक दिक्कतों के बावजूद भी इन्होने 60 Kilograms Category में कांस्य पदक जीत कर इतिहास रचा तथा भारत का नाम रोशन कर दिया !

दत्त ने 2008 में बीजिंग ओलिंपिक में लगातार दूसरी बार हिस्सा लिया व 60 Kilograms Category में 9वें स्थान पर रहे, इसके बाद इन्होने 2010 में Delhi कामनवेल्थ गेम्स में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया, 2012 में लगातार तीसरी बार ओलम्पिक में हिस्सा लेकर इन्होने देश के लिए कांस्य पदक जीता व के डी जाधव और सुशील कुमार के बाद ओलंपिक मेडल जीतने वाले तीसरे भारतीय पहलवान बनें अपने शानदार प्रदर्शन के लिए इन्हें भारतीय सरकार ने राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया ! हमें गर्व है योगेश्वेर दत्त पर व हम आशा करते हैं की वह करोड़ों भारतीय समर्थकों का सपना पूरा करेंगे |

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