लेखकों और वैज्ञानिकों द्वारा पुरस्कार लौटाया जाना, सिर्फ एक दिखावा : पूर्व इसरो प्रमुख

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देश के वैज्ञानिकों और लेखकों द्वारा अपने पुरस्कार लौटाए जानी की निंदा करते हुए पद्म पुरस्कार से इसरो के पूर्व प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिक डा. माधवन नायर ने कहा कि ऐसे लोगों की गतिविधियाँ सिर्फ दिखावा है, भारत जैसे विशाल देश में कुछ घटनाएँ हो सकती हैं इसके लिए किसी सरकार या किसी एक समूह को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता |

उन्होंने कहा “इस तरह के सम्मान लोगों को उनकी जीवन भर की उपलब्धियों के लिए दिए जाते हैं उन्हें लौटाकर आप उसके महत्त्व को कम कर रहे हैं, लोगों को गौर्वान्विर होना चाहिए की राष्ट्र ने उन्हें सम्मानित किया, पुरस्कार लौटने से न तो सरकार को कोई मदद मिलती है नाही लोगों को इसलिए पुरस्कार लौटाना विरोध प्रदर्शन का सही तरीका नहीं है |

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों और लेखकों जैसे परिपक्व लोगों को इस तरह से प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए और उन्हें रचनात्मक तरीके से प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिए |

उन्होंने कहा कि सम्मान लौटाने की कार्रवाई ‘‘सिर्फ एक दिन के लिए खबर बनती है’’ और इससे कोई मकसद नहीं पूरा होता. कोई यह काम कर सकता है कि वह ‘‘संबंधित लोगों’’ से बातचीत करे, उन्हें राजी करे और उन्हें ‘‘मुख्य धारा’’ में वापस लाए.

 

उन्होंने कहा, ‘‘और उसके बाद हम कह सकते हैं कि हमने समाज के लिए कुछ किया है. हमें अग्र.सक्रिय होना होगा और इस प्रकार के कदम के बदले सुधारात्मक कदम उठाना होगा…. मैं कहूंगा कि यह सिर्फ दिखावा है.’’ यह पूछे जाने पर कि कथित असहिष्णुता की घटनाओं के लिए सरकार को दोषी ठहराना अनुचित होगा, नायर ने कहा, ‘‘निश्चित रूप से. सरकार के पास पहले से ही काफी जिम्मेदारियां हैं. वे देश के विकास और आम लोगों की समस्याओं को दूर करने की बात कर रहे हैं. यह काफी कठिन कार्य है.’’

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