हत्या कर खून से लिखा दूसरे का नाम, मौके पर नहीं छोड़ा था कोई सबूत


वाराणसी/सिगरा (ब्यूरो) पुलिस ने 26 जून की देर रात को कोलगेट एजेंसी के कैशियर अशोक गुप्ता की हत्या का खुलासा कर लिया है। इसे पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है कि जिस हत्याकांड को लेकर पुलिस के पास कोई सुराग नहीं था उसका भी खुलासा करने में सफलता मिल गयी है। मंगलवार को एसएसपी आरके भारद्वाज ने इस हत्याकांड का खुलासा किया है।

एसएसपी आरके भारद्वाज ने बताया कि सिगरा पुलिस ने बेहतरीन ढंग से काम करते हुए हत्यारे को पकड़ा है। पुलिस के अनुसार एजेंसी का वाहन चालक गौतम कुमार गौड ने ही पैसा लूटने के लिए कैशियर अशोक कुमार गुप्ता की बेरहमी से हत्या की थी। पुलिस ने शिवपुर थाना क्षेत्र के चमाव निवासी गौतम को गिरफ्तार करके लूटे गये 1014000 रुपये बरामद कर लिए हैं। साथ ही पुलिस ने कत्ल में बरामद चाकू, मृतक का पैंट व शर्ट, प्लास्टिक बैग व स्टील के डिब्बे भी बरामद किया है, जिसमे लूटे गये रुपये रखे हुए थे। पुलिस ने सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करने वाले सिगरा एसओ गोपाल जी गुप्ता, एसआई अभय कुमार सिंह एव अन्य पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत भी किया गया है।

हत्या करने के बाद खून से लिख दिया था दूसरे का नाम
गौतम कुमार गौड इसी एजेंसी में वाहन चालक था। उसे पता था कि यहां पर कितना पैसा आता है। प्रतिदिन की तरह वह अपना काम खत्म करके सबको बोल कर ऑफिस से निकल गया था। इसके तुरंत बाद ही गौतम ने अपने चेहरे को कपड़े से छिपाया और पिछले रास्ते से फिर ऑफिस में जाकर छिप गया। देर रात में वह छिपे हुए स्थान से निकला और जहां पर पैसा रखा जाता था वहां पर पहुंच गया। इस जगह पर कैशियर अशोक कुमार गुप्ता लेटे हुए था और रेडियो पर गाना सून रहे थे। गौतम ने लेटे हुए अशोक के उपर सफेद चादर डाल दी और फिर चाकू से कई प्रहार करके कैशियर की जान ले ली। इसके बाद वहां पर रखा 1014000 रुपया लूट लिया। गौतम ने एक और तिजोरी को तोडऩे की कोशिश की थी, जिसमे 20 लाख से अधिक रुपया रखा था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पायी। रुपये लूटने के गौतम ने मृतक के खून से वहां पर विकाश नाम लिखा और सीसीटीवी का डीवीआर निकल कर सीधे घर गया। गौतम ने घर में जमीन के अंदर रुपयों को छिपा दिया। इसके बाद वह नियमित ऑफिस भी जाता था, ताकि किसी को शक न हो।

मोबाइल के गलत नम्बर से पकड़ा गया अपराधी
पुलिस के लिए घटना का खुलासा करना आसान नहीं था। मौक पर कोइ ऐसा सबूत नहीं था, जिससे पुलिस यह पता कर सके कि किसने हत्या की है। पुलिस ने वहां पर कार्यरत सभी कर्मचारियों से अपना मोबाइल नम्बर व पूरा विवरण कागज पर लिख कर देने को कहा। सभी कर्मचारियों ने लिख कर दे दिया था, लेकिन गौतम ने अपना मोबाइल नम्बर ही गलत लिखा था, जिससे पुलिस को गौतम पर शक हुआ। इसके बाद पुलिस ने जमीन पर लिखे विकास व गौतम द्वार दिये गये विवरण को मिलाया तो दोनों की लिखावट एक मिली। इसके बाद सिगरा पुलिस ने गौतम का पुरान रिकॉर्ड चेक किया तो पता चला कि वर्ष 2015 में वह चोरी के एक मामले में जेल जा चुका है। इस मामले में दुकान से मिली सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ही गौतम की पहचान हुई थी इसलिए सिगरा के होटल प्लाजा इन के बगल में लूट व हत्या करने के बाद गौतम ने सीसीटीवी के डीवीआर को निकाल कर वरुणा नदी में फेंक दिया था, जो नहीं मिल पाया है।

लूट के पैसे से गोवा घुमने जाना चाहता था गौतम
एसएसपी के अनुसार गौतम को अपनी बहन की शादी करनी थी और वह ऑटो खरीद कर चलाना चाहता था, जिसके लिए ही उसने हत्या व लूट जैसे अपराध को अंजाम दिया था। गौतम से पूछे जाने पर उसने अपनी गलती मानी और कहा कि जब सब मामला शांत हो जाता तो वह गोवा घुमने के लिए जाना चाहता था। फिलहाल चर्चित हत्याकांड का जिस तरह से पुलिस ने खुलासा किया है उसकी सभी ने सराहना की है।

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