कांग्रेस सरकार का यह निर्णय देश को पड़ा भारी,विश्व अदालत ने लगाया 6700 करोड़ का जुर्माना, अन्य कई नुकसान |

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                                                               image Courtesy – techrights

हेग- अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में भारत को एक बहुत बड़े मुकदमे में हार का सामना करना पड़ा है | दरअसल यह मुकदमा कांग्रेस सरकार के समय में लिए गए एक गलत निर्णय के तहत भारत सरकार के खिलाफ एक निजी क्षेत्र की कंपनी ने दायर किया था |

2 सेटेलाइट्स और स्पेक्ट्रम की डील कैंसिल कर मुश्किल में पड़ गया भारत –
दरअसल आपको बता दें कि भारत सरकार की संस्था इसरो ने निजी क्षेत्र की कंपनी देवास मल्टीमीडिया के साथ एक करार किया था जिस डील के मुताबिक ऐंट्रिक्स एस-बैंड स्पेक्ट्रम में लंबी अवधि के दो सैटलाइट्स ऑपरेट करने पर राजी हो गया था | लेकिन, बाद में उसने डील कैंसल कर दी | ट्राइब्यूनल ने कहा कि डील कैंसल कर सरकारा ने उचित नहीं किया जिससे देवास मल्टिमीडिया के निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ |

भारत सरकार को हो सकता है 67 अरब रूपये का भारी भरकम नुकसान –
भारत के खिलाफ आये इस फैसले में भारत को 67 अरब रूपये का नुकशान हो सकता है | इतना ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों की नजर में भी भारत की छवि को भी अच्छा खासा नुकसान हो सकता है |

भारत सरकार की संस्था इसरो के कमर्शल आर्म एंट्रिक्स ने वर्ष 2005 में यह डील देवास मल्टीमीडिया के साथ किया था | लेकिन बाद में इस डील को कैंसिल कर दिया गया था जिसके बाद देवास ने अच्छा ख़ासा एतराज जताया था | बाद वर्ष 2015 में देवास मल्टीमीडिया ने अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय में भारत सरकार के खिलाफ मुकदमा कर दिया था | ऐसा देवास ने इसीलिए किया क्योंकि इसरो भी भारत सरकार की ही एक संस्था है | इस मुकदमे की सुनवाई के बाद अब यह फैसला दिया गया है |

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