यमदूत बनकर संचालित हो रहे , निजी ट्रैक्टर- ट्राली

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बछरावां/रायबरेली (ब्यूरो)- क्षेत्र में निजी कृषि कार्य के लिए खरीदी गई ट्रैक्टर- ट्रालियों का खुलेआम व्यावसायिक रूप में प्रयोग किया जा रहा है। वही विभागीय अफसरों एवं स्थानीय पुलिस की उदासीनता के चलते ये ट्रैक्टर-ट्रालियां लोगो की हँसती-खेलती जिंदगी में भी खलल डाल रही है। जबकि आंकड़े देखें जाये तो कस्बे से लेकर जनपद तक मे सैकड़ो लोग अपनी जान गवा चुके है। लेकिन स्थानीय प्रशासन से लेकर ए आर टी ओ तक सब कुछ जानते हुए भी इन पर कार्यवाही करने से क्यों कतरा रहे है। लोगो के बीच यह कौतूहल बना हुआ है। एक तरफ आये दिन चेकिंग करने वाला विभाग इन अवैध रूप से संचालित हो रही ट्रैक्टर- ट्रालियों पर इतना मेहरबान क्यों है।

गौरतलब हो कि कस्बा बछरावां से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक यह ट्रैक्टर-ट्राली मालिको द्वारा बड़ी चालाकी से निज़ी कृषि कार्य हेतु के बजाय व्यावसायिक कार्य मे प्रयोग किया जा रहा है। लोग भट्ठों पर गाड़ी लगाकर मिट्टी और ईटो की ढुलाई कर रहे है।सरकारी कार्य जैसे नहर की खुदाई या पट्टी पर कार्य हो, मौरंग, बालू, गिट्टी, लकड़ी कहने का मतलब वर्तमान परिवेश में ट्रैक्टर-ट्रालियों का चलन इतना बढ़ चुका है कि हर कार्य यह ट्रैक्टर-ट्रालियां कर रही हैं।

यही नही बारातो से लेकर, धार्मिक आयोजनों,पर्वों तथा गंगा स्नान या अन्य स्नान व शवों को ले जाने में भी अहम भूमिका निभा रहे है तथा खुलेआम सवारी ढोने में भी पीछे नही हटते है। जबकि क्षेत्र में ट्रैक्टर- ट्रालियों से काफी दुर्घटनाये घटित हो चुकी है या घट रही है।

कहने का तात्पर्य यह है कि यह किसी यमदूत से कम नही है। यही नही सूबे में जबसे नई सरकार बनी है तब से ए आर टी ओ द्वारा सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है लेकिन इस प्रशासन को ये अवैध ट्रालियां नज़र नही आ रही है। सबसे उल्लेखनीय तो यह है कि कस्बा बछरावां में काफी अरसे से कई गिरोह सक्रिय है जो कि स्वयं तो कई ट्रैक्टर रखे है। लेकिन दर्जनों ट्रैक्टर व जेसीबी किराये पर लेकर क्षेत्र में मिट्टी खनन का कार्य कर रहे है।

आज स्थिति यह है कि कस्बा बछरावां के आस-पास जितनी खाली जमीनें थी उनको खोदकर तालाब का रूप दे दिया गया।यही नही ग्रामसमज व चारागाह की जमीनों को भी नही बख्शा गया।आज भी यह गिरोह पूर्व की भांति काम कर रहा है। लेकिन क्या मजाल है कि स्थानीय प्रशासन, तहसील प्रशासन व जिला प्रशासन इन पर हाथ डाल सके। क्योकि इनको खुलेआम राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है। एक तरफ अवैध खनन पर प्रदेश सरकार गंभीर है। दूसरी तरफ राजधानी का नजदीक का कस्बा अवैध खनन का शिकार है विडम्बना इस बात की है कि पुलिस प्रशासन हो या परिवहन प्रशासन चेकिंग अभियान आये दिन चलाता है। लेकिन यह अवैध ट्रैक्टर-ट्रालियां कस्बे से लगाकर शहर तक अपनी आमद दर्ज़ करा रही है। कहीं भूसा लेकर,कही मिट्टी लेकर तो कही ईटे लेकर समस्त कार्य कर रही है। लेकिन इन पर प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार का अंकुश नही लगाया जा पा रहा है। जिससे क्षेत्र के संभ्रांत व बुद्धिजीवी लोगो मे इस सौतेले व्यवहार से जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। लोगो ने जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यानकर्षन कराते हुए इन पर कार्यवाही की माग की है। ताकि इन यमदूत बनी ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ-साथ अवैध खनन पर रोक लग सके।

रिपोर्ट- जयसिंह पटेल 

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