भगवान श्री कृष्ण की पवित्र भूमि के लोग आज हैं, मजबूर मलमूत्र से स्नान करने और उसे पीने के लिए-

0
921

भारत की दो प्रमुख नदियों में से एक जिसे हम माँ कहते हैं, और माँ समझ ही हम उसके जल को अपने पवित्र मंदिर में ईश्वर को अर्पित भी करते हैं और स्वयं भी उसी जल से आचमन करते हैं तथा नहाने धोने और पीने के लिए भी प्रयोग करते यह समझकर कि जिस जल को हम अपने आराध्य ईश्वर के ऊपर अर्पित कर रहे हैं उनका अभिषेक कर रहे हैं वह एक पवित्र जल हैं, और हम उसी जल को पवित्र समझ यह सोचते हैं कि गर हम इस जल से आचमन करेंगे या फिर इस जल से अपने पितरों का तर्पण करेंगे तो हमें और उन्हें दोनों को ही मुक्ति मिल जाएगी लेकिन यह आपकी सबसे बड़ी भूल हैं क्योंकि जिस जल को आप पवित्र कालिंदी का जल समझते हैं वह यमुना (कालिंदी) का जल नहीं बल्कि दिल्ली का मल-मूत्र हैं इसके अलावा और कुछ नहीं I

yamuna river
दिल्ली में जल विहार के लिए और मछली पकड़ने के लिए खड़ी नाव
yamuna river
दिल्ली में जल विहार के लिए और मछली पकड़ने के लिए खड़ी नाव, देखिये जरा आप भी यमुना का एक द्रश्य …

आखिर कहा जाता हैं माँ यमुना (कालिंदी) जी का पवित्र जल –

हम आपको बता दें कि दिल्ली से पहले ही यमुना (कालिंदी) जी का सारा जल दो बैराजों के द्वारा यमुना से निकाल लिया जाता हैं और उसे कैनाल के द्वारा वाटरट्रीटमेंट प्लांट में भेज दिया जाता हैं जिससे दिल्ली की लगभग 2.5 करोड़ की आबादी को पीने के लिए पानी दिया जा सके I अब यहाँ पर प्रश्न यह उठता हैं कि ठीक हैं, दिल्ली के लोगों को पीने के लिए पानी तो दे दिया जाता हैं लेकिन क्या दिल्ली के बाद जिधर से यमुना जी गुजरती हैं वहां लोग नहीं रहते और रहते हैं तो क्या उन्हें यमुना जी के शुद्ध पानी का कोई अधिकार नहीं हैं ?

न केवल यमुना जी के पानी को रोका जाता हैं उसके अलावा दिल्ली के सभी गंदे नालों का गन्दा प्रदूषित जल भी यमुना जी में ही प्रवाहित कर दिया जाता हैं I

दिल्ली में यमुना जी में गिरते हुए नालों की कहानी –

यही वह 22 किलोमीटर लम्बी जगह हैं जहाँ से पवित्र कालिंदी (माँ यमुना) एक पवित्र जल के साथ बहने वाली नदी से दिल्ली का मल-मूत्र ढोने वाले एक गंदे नाले में तब्दील हो जाती हैं क्योंकि इस 22 किलोमीटर की दूरी में दिल्ली के 18 गंदे नालों का मुंह पवित्र यमुना जी के जल में खोल दिया जाता हैं, इन नालों में कोई जल नहीं होता हैं बल्कि लोगों के गटर का, उनके किचन का, टॉयलेट का गन्दा पानी होता हैं जिसे लोग छूना तो दूर की बात हैं कोई देखना भी पसंद नहीं करता हैं I लेकिन फिर इस पवित्र देश के लोगों की भावनाओं को तो जरा देखों दिल्ली के बाहर निकलते ही वह इस यमुना के टॉयलेट और गटर के बहते हुए पानी को माँ यमुना का पवित्र जल मान कर पितरों का तर्पण करते हैं, भगवान् का अभिषेक करते हैं और स्वयं भी स्नान और आचमन करते हैं I

yamuna river
दिल्ली में यमुना का काला सच, आप स्वयं विचार करो कि क्या यह जल हैं आचमन करने या फिर नहाने लायक ?
yamuna river
दिल्ली में यमुना का काला सच, आप स्वयं विचार करो कि क्या यह जल हैं आचमन करने या फिर नहाने लायक ?

क्या कहते हैं सरकारी कानून –

सरकारी कानून की बात करें तो देश किसी भी शहर को देश की किसी भी नदी में बिना शोध के पानी को उस नदी के पवित्र जल में प्रवाहित करने का आदेश नहीं हैं लेकिन इसके बावजूद भी देश के लगभग सभी शहरों की नगरपालिकायें उनके मुख्यमंत्री गण खामोश हैं, कोई इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा हैं और धड्डले से यमुना जैसी पवित्र नदियों को लोग प्रदूषित करते जा रहे हैं, और सबसे बड़ी आश्चर्य की बात तो यह हैं कि उन्हें यह भी नहीं पता कि जिस यमुना को वह यहाँ पर प्रदूषित कर रहे हैं उसी यमुना का ही प्रत्यक्ष या फिर अप्रतक्ष रूप से वह खुद भी पी रहे हैं और उसी में नहा भी रहे हैं I

कैसे पीते हैं हम स्वयं ही प्रदूषित पानी –

क्योंकि जो हम पानी पीते हैं वह कहीं और से नहीं बल्कि इन्ही नदियों से आता हैं उसका कारण यह हैं कि जब यह नदियाँ हमारे शहरों के आस-पास से गुजरती हैं तो यह हमारे जल स्तर को रीचार्ज करती हैं, यानि की जल स्तर को ऊपर उठा देती हैं और जिस जल से हमारे पीने के पानी का जल स्तर ऊपर उठता हैं वह इन्ही नदियों का प्रदूषित जल होता हैं और हमारे नलों में वहीँ जल से फिर से आता हैं तो इस तरह से हम फिर से वहीं अपने द्वारा ही फैलाया गया प्रदूषित जल ही पीते हैं I

yamuna river
दिल्ली में यमुना के किनारे हाथ, पैर धुलते हुए लोग
yamuna river
दिल्ली में यमुना का काला सच, आप स्वयं विचार करो कि क्या यह जल हैं आचमन करने या फिर नहाने लायक ?

आइये दोस्तों कसम खाते हैं कि अब हम जल प्रदुषण नहीं फैलायेंगे बल्कि इसे रोकने का प्रयास करेंगे I आने वाले समय में हम आप सभी अपनों के लिए जल को संचित करने और प्रदूषित न करने से लेकर तमाम शोध आप सभी के सामने लेकर आयेंगे I

और आप अपने सुझाव और सलाह भी हमें दें सकते हैं, हम उन्हें अपने इस सीरिज में शामिल करने का पूरा प्रयास करेंगे I

आप हमें ईमेल कर सकते हैं -: dpsingh@akhandbharatnews.com

धन्यवाद !

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

two + eight =