यशवंत सिन्हा ने छोड़ी भाजपा, कहा लोकतंत्र खतरे में है, जानें कौन है यशवंत सिन्हा

पटना- कभी भारतीय जनता के दिग्गज नेता रहे पूर्व वित्त मंत्री और विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने आज भारतीय जनता पार्टी से अपना त्यागपत्र दे दिया है | उन्होंने पटना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा है कि मैं आज भारतीय जनता पार्टी से त्यागपत्र दे रहा हूँ | उन्होंने साथ ही यह भी एलान किया है कि ऐसा नहीं है कि वह भाजपा को छोड़कर किसी अन्य पार्टी को ज्वाइन करने का प्लान कर रहे है |

मोदी सरकार को लिया आड़े हाथों-
भाजपा के पूर्व दिग्गज नेता ने पटना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है और कहा है कि आज देश में ऐसा माहौल बन रहा है कि लोकतंत्र खतरे में जान पड़ता है | ऐसे में अगर हम आज चुप रहे तो आने वाले समय में जो भविष्य की पीढ़िया हैं वह हमसे सवाल अवश्य पूछेंगीं |

इंदिरा गांधी के बक्त की दिलाई याद-
उन्होंने आगे कहा है कि जब कभी भी लोकतंत्र खतरे में पड़ा है हमेशा पटना की धरती से आवाज बुलंद की गयी है| जाहिर सी बात है कि ऐसा कहकर वह इंदिरा गांधी के बक्त की याद दिला रहे थे क्योंकि 1975 इंदिरा गांधी की सरकार के विरुद्ध पटना के गांधी मैदान से ही जयप्रकाश नारायण ने एक जनआ आन्दोलन का बिगुल फूंका था जो दिल्ली तक पहुंचा था और इसी आन्दोलन के चलते बाद में देश में इमरजेंसी लागू कर दी गयी थी जो 1977 तक चली थी |

कौन है यशवंत सिन्हा-
यशवंत सिन्हा का जन्म बिहार के पटना में हुआ था | उन्होंने पटना से 1958 में राजनीति शास्त्र में एमए की डिग्री हासिल की और उसके बाद वह पटना विश्वविद्यालय में 1960 तक शिक्षण का भी कार्य किया जब तक वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल नहीं हो गए |

1960 में उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए हुआ जिसके लिए उन्होंने 24 वर्षों तक कार्य किया | इस दौरान वे कई महत्त्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे | 4 वर्षों तक उन्होंने सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट के रूप में सेवा की | बिहार सरकार के वित्त मंत्रालय में 2 वर्षों तक अवर सचिव तथा उप सचिव रहने के बाद उन्होंने भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय में उप सचिव के रूप में कार्य किया |

1971 से 1973 के बीच उन्होंने बॉन, जर्मनी के भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव (वाणिज्यिक) के रूप में कार्य किया था | इसके पश्चात उन्होंने 1973 से 1974 के बीच फ्रैंकफर्ट में भारत के कौंसुल जनरल के रूप में काम किया | इस क्षेत्र में लगभग सात साल काम करने के बाद उन्होंने विदेशी व्यापार और यूरोपीय आर्थिक समुदाय के साथ भारत के संबंधों के क्षेत्र में अनुभव प्राप्त किया | तत्पश्चात उन्होंने बिहार सरकार के औद्योगिक आधारभूत सुविधाओं के विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर) तथा भारत सरकार के उद्योग मंत्रालय में काम किया जहां वे विदेशी औद्योगिक सहयोग, प्रौद्योगिकी के आयात, बौद्धिक संपदा अधिकारों और औद्योगिक स्वीकृति के मामलों के लिए जिम्मेदार थे | 1980 से 1984 के बीच भारत सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में सड़क परिवहन, बंदरगाह और जहाजरानी (शिपिंग) उनके प्रमुख दायित्वों में शामिल थे |

राजनैतिक जीवन की शुरुवात-
यशवंत सिन्हा ने 1984 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया और जनता पार्टी के सदस्य के रूप में सक्रिय राजनीति से जुड़ गए | 1986 में उनको पार्टी का अखिल भारतीय महासचिव नियुक्त किया गया और 1988 में उन्हें राज्य सभा के लिए चुना गया | 1989 में जनता दल का गठन के बाद उनको पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया | उन्होंने चन्द्र शेखर के मंत्रिमंडल में नवंबर 1990 से जून 1991 तक वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया, जब तक चंद्रशेखर की सरकार सत्ता में रही |

जब जनता दल का विघटन हुआ और भाजपा नई पार्टी बनी तो वे भाजपा में शामिल हो गए और जून 1996 में वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने | मार्च 1998 में उनको वित्त मंत्री नियुक्त किया गया, उस दिन से लेकर 22 मई 2004 तक संसदीय चुनावों के बाद नई सरकार के गठन तक वे विदेश मंत्री रहे | उन्होंने भारतीय संसद के निचले सदन लोक सभा में बिहार (अब झारखंड) के हजारीबाग निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया | हालांकि, 2004 के चुनाव में हजारीबाग सीट से यशवंत सिन्हा की हार को एक विस्मयकारी घटना माना जाता है। उन्होंने 2005 में फिर से संसद में प्रवेश किया। 13 जून 2009 को उन्होंने भाजपा के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया |

वित्तमंत्री के तौर पर कैसा रहा कार्यकाल-
यशवंत सिन्हा 1 जुलाई 2002 तक वित्त मंत्री बने रहे, तत्पश्चात विदेश मंत्री जसवंत सिंह के साथ उनके पद की अदला-बदली कर दी गयी | अपने कार्यकाल के दौरान सिन्हा को अपनी सरकार की कुछ प्रमुख नीतिगत पहलों को वापस लेने के लिए बाध्य होना पड़ा था जिसके लिए उनकी काफी आलोचना भी की गयी | फिर भी, सिन्हा को व्यापक रूप से कई प्रमुख सुधारों को आगे बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है जिनके फलस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था दृढ़तापूर्वक विकास पथ पर अग्रसर हुई है | इनमें शामिल हैं वास्तविक ब्याज दरों में कमी, ऋण भुगतान पर कर में छूट, दूरसंचार क्षेत्र को स्वतंत्र करना, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के लिए धन मुहैया करवाने में मदद और पेट्रोलियम उद्योग को नियंत्रण मुक्त करना | सिन्हा ऐसे प्रथम वित्त मंत्री के रूप में भी जाने जाते हैं जिसने भारतीय बजट को स्थानीय समयानुसार शाम 5 बजे प्रस्तुत करने की 53 वर्ष पुरानी परंपरा को तोड़ा; यह प्रथा ब्रिटिश राज के ज़माने से चली आ रही थी जिसमे भारतीय बजट को भारतीय संसद की सुविधा की बजाय ब्रिटिश संसद (1130 एएम, जीएमटी) की सुविधानुसार पेश करने की कोशिश की जाती थी।

सिन्हा ने “कन्फेशंस ऑफ ए स्वदेशी रिफॉर्मर (एक स्वदेशी सुधारक के विचार)” नामक पुस्तक में वित्त मंत्री के रूप में अपने द्वारा बिताए गए वर्षों का विस्तृत ब्यौरा दिया है।

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