अब तक नहीं बन सका किसानों की कर्ज माफी का प्रारूप

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प्रतीकात्मक

लखनऊ (ब्यूरो) योगी सरकार ने वायदे के मुताबिक लघु व सीमांत किसानों के फसली ऋण माफ करने की घोषणा तो कर दी पर इसका प्रारूप अभी तक तय नहीं हो सका है। घोषणा के तुरंत बाद बैंकों में इसे लेकर आई तेजी खत्म हो चुकी है। उलटे कुछ बैंकों ने किसानों पर बकाया कर्ज की वसूली के लिए उन्हें नोटिस जारी कर दी जिसका संज्ञान मुख्यमंत्री को लेना पड़ा।

मालूम हो कि भाजपा ने अपने लोक कल्याण संकल्प पत्र में लघु व सीमांत किसानों के फसली ऋण माफ करने का वायदा किया था। विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जनसभाओं में कहा था कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो कैबिनेट की पहली बैठक में किसानों के कर्जमाफी की घोषणा कर दी जाएगी।

भाजपा सरकार बनी तो वायदे के अनुसार पहली कैबिनेट बैठक में लघु और सीमांत किसानों द्वारा 31 मार्च, 2016 तक लिए गए कर्ज को एक लाख रुपये तक की सीमा तक माफ करने का फैसला हुआ। तब अनुमान लगाया गया था कि ऐसे किसानों की संख्या करीब 86 लाख होगी और उन पर बकाये की रकम 36359 करोड़ रुपये होगी।

प्रदेश सरकार की खराब आर्थिक स्थिति के मद्देनजर अपने स्रोतों से इतनी बड़ी रकम का बंदोबस्त करना मुश्किल है। लिहाजा कर्जमाफी की घोषणा के बाद से ही इसके तौर-तरीकों पर माथापच्ची जारी है। विभागों द्वारा बांड जारी करने, खर्चों में कटौती से लेकर कर्जमाफी के आंध्र प्रदेश माडल पर भी चर्चा हो चुकी है। इनके आने पर ही मुकम्मल रूप से माफी के दायरे में आने वाले किसानों की संख्या और रकम का पता चलेगा।

फिलहाल सरकार अपने खजाने से ही किसानों की कर्जमाफी के लिए जुगत लगा रही है। सूत्रों के अनुसार, कर्ज माफी के लिए बैंकों एवं राजस्व विभाग से लघु और सीमांत किसानों के आंकड़े मांगे गए हैं। इसके बाद ही कर्ज माफी को लेकर तस्वीर साफ हो सकेगी।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा, सरकार अपनी घोषणा के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बैंकों और राजस्व विभाग से ब्योरा आने लगा है।

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