योग से होता शरीर का विकास योग करो निरोग रहो : हरेन्द्र सिंह

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दहगवां/बदांयूँ (ब्यूरो) पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के तत्वाधान में योगाचार्य जिला योग प्रचारक हरेंद्र सिंह आर्य के द्वारा ग्राम खरखोल  मैं पांच दिवसीय निशुल्क योग शिविर का आयोजन किया गया शिविर का शुभारंभ आचार्य मुनेंद्र जी ने दीप प्रज्वलित करके किया |

योगाचार्य जी ने योग का इतिहास बताते हुए कहा कि योग दर्शन महर्षि पतंजलि की रचना है इस ग्रंथ में चार पाद  हैं, सूत्रों की संख्या 194 है आकार की दृष्टि से यह दर्शनों में सबसे छोटा है परंतु महत्व की दृष्टि से सब दर्शनों में महान है योग का शब्द के अनेकार्थी इधर योगे तथा इस समाधि धातु से योग शब्द सिद्ध होता है इसका अर्थ है जुड़ना या समाधि को प्राप्त करना अर्थात आत्मा का परमात्मा के साथ जुड़ना या समाधि को प्राप्त करना समाधि को प्राप्त करने के लिए अभ्यास और वैराग्य का प्रबल साधन के रूप में महर्षि पतंजलि ने निर्देश दिया है अलग-अलग साधकों की चित्त की स्थिति के अनुसार योग दर्शन के चारों पदों में अलग-अलग विदिशा समाधि को समाधि को प्राप्त करने के उपाय महर्षि पतंजलि के निर्देशित किए हैं किंतु सभी विधाओं का गंतव्य अभिधा का नाश संस्कारों को दिगंत बीज करने के भगवा अब वर्क को प्राप्त करना है इस अवसर पर बाबू राम जी श्याम मुनि जी बृजपाल जी उमेश जी गिरीश जी रूम सिंह जी रामचंद्र जी विनोद आर्य  मुनेंद्र आर्य आदि लोग उपस्थित रहे।

रिपोर्ट – प्रमोद गुप्ता

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