मुझे कुत्ता कह लो लेकिन पर पाकिस्तानी मत कहो

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दिल्ली- 15 अगस्त 1947 को दुनिया के नक़्शे पर सबसे तेजी से आजादी मांगने वाले 2 देशों को तो आज़ादी मिल गयी | लेकिन एक देश न तब आज़ाद हुआ था और न ही आज ही वह आज़ाद हो सका है | जिन 2 देशों को अंग्रेजों से आज़ादी मिल गयी थी उनमें से एक देश था पाकिस्तान और दूसरा था हिन्दुस्तान | लेकिन एक देश जो आज भी अपनी आज़ादी की जंग लड़ रहा है वह है बलूचिस्तान | बलूचिस्तान पिछले 70 सालों से पाकिस्तान में आज़ादी की जंग लड़ रहा है लेकिन आज तक उसे इस जंग में सफलता नहीं मिल सकी है | बल्कि उसनें अपना बहुत कुछ गँवा दिया है |

अब तक 50 हजार बलूचिस्तान के लोगों को मार चुकी है पाकिस्तानी सेना –
पाकिस्तान के इस सबसे बड़े प्रांत जिसे बलूचिस्तान के नाम से जाना जाता है क्षेत्रफल की द्रष्टि से यह तक़रीबन आधे पाकिस्तान के बराबर है लेकिन आबादी के मामले में यह पाकिस्तान की आबादी के मामले में मात्र 3.2 प्रतिशत ही है | बलूचिस्तान की आबादी मात्र 1.5 करोंड है और उसमें से भी आज़ादी से लेकर अब तक पाकिस्तानी सेना तक़रीबन 50 हजार लोगों को मार दिया है |

मुझे कुत्ता कह दो मगर पाकिस्तानी मत कहो –
हाल ही में भारत आये एक बलूचिस्तान के शरणार्थी से जब दिल्ली के हवाई अड्डे पर एयरपोर्ट अधिकारियों ने पूछा कि क्या आप पकिस्तान से हो तो इस पर उन्होंने कहा कि नहीं | उन्होंने कहा कि मुझे आप कुत्ता बुलाओ चलेगा लेकिन कृपया मुझे पाकिस्तानी मत बुलाओ | दरअसल आपको बता दें कि बलूचिस्तानी शरणार्थी मज़दक दिलशाद अपनी पत्नी के साथ भारत आये हुए है | दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही एयरपोर्ट अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया और उनसे पूछताछ करने लगे | बताते चले कि वैसे तो दिलशाद के पास कनाडाई पासपोर्ट है लेकिन उस पासपोर्ट में पाकिस्तान के शहर क्वेटा का नाम उनके जन्मस्थान की जगह पर पड़ा हुआ है इसी कारण से भारतीय अधिकारियों ने उनसे पूछताछ शुरू कर |

मजदक ने इकॉनोमिक टाइम्स से बातचीत करते हुए बताया है कि उन्हें भारतीय अधिकारियों के सामने यह साबित करने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा कि मै एक पाकिस्तानी नहीं हूँ | उन्होंने अधिकारियों से बलूचिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किये जा रहे अत्याचारों के बारे में बताया | इसी दौरान उन्होंने कहा कि मुझे कुत्ता बुलाओ आप लोग लेकिन मै पाकिस्तानी नहीं हूँ | मै एक बलूच नागरिक हूँ | उन्होंने कहा कि मेरे जन्मस्थान की वजह से मुझे अनेकों बार परेशानियों का सामना करना पड़ा है |

बलोच स्वतंत्रता के मामले में जागरूकता फैलाने के लिए आये है –
आपको बता दें कि दिलशाद अपनी पत्नी के साथ भारत बलोच की स्वतंत्रता के लिए जागरूकता फैलाने के लिए आये हुए है | मजदक ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया है कि मुझे इस बात की बेहद ख़ुशी है कि आज़ादी के 70 साल बाद ही सही लेकिन पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने हमारे समर्थन में भारत के द्वारा खोले है |

मज़दक दिलशाद ने मीडिया से बात करते हुए बताया है कि उनका जीवन बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा है | जीवन में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा है | दरअसल मज़दक ने बताया कि उनके पिता को जो कि एक पाकिस्तानी फिल्म मेकर थे उन्हें पाकिस्तानी सेना उठा ले गयी थी और 2 सालों तक बुरी तरह से परेशान करनेके बाद उन्होंने हमारी पूरी प्रॉपर्टी को तबाह बर्बाद कर दिया मेरी माँ को बहुत परेशान किया गया | बाद में काफी कोशिशों के बाद हमारे पिता को छोड़ा गया | अब हम पाकिस्तान में नहीं रहते है हमने पाकिस्तान छोड़ दिया है और अब हम कनाडा में रहते है |

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